नारनौल। मानसून की दस्तक से पहले शहर में नालों की सफाई को लेकर प्रशासन के दावों और हकीकत में अंतर दिखा रहा है। जिला उपायुक्त ने पूरे जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर 30 जून तक सफाई कार्य की रिपोर्ट मांगी है। बावजूद इसके शहर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में सफाई कार्य अधूरा पड़ा है।
शहर के विभिन्न मोहल्लों की पड़ताल करने पर सामने आया कि जिन इलाकों में हर वर्ष जलभराव की सबसे अधिक समस्या रहती है, वहीं नालों की सफाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
कुछ स्थानों पर एक-दो दिन सफाई अभियान चलाने के बाद काम ठप पड़ गया। कई बड़े नालों की वर्षों से समुचित सफाई नहीं होने के कारण उनमें गंदगी के साथ घास-फूस तक उग आई है।
मोहल्ला नलापुर से रावका के बीच बने नाले में गाद और घास जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित है। नागरिक अस्पताल से काठ मंडी जाने वाले मार्ग पर स्थित नाले के हालात भी चिंताजनक है।
संघीवाड़ा क्षेत्र में नालियां रुकी हुई हैं जबकि जमालपुर में सफाई कार्य आधा-अधूरा ही किया गया है। नलापुर के एक हिस्से में नाले से निकाली गई कीचड़ अब भी सड़क किनारे पड़ी है।
इसके अलावा पार्क गली बाजार, रेवाड़ी रोड तथा बस स्टैंड क्षेत्र के पानी की निकासी करने वाला प्रमुख नाला भी गंदगी से अटा पड़ा है। वहीं मोहल्ला खड़खड़ी, सलामपुरा, बावड़ीपुर, बड़का कुआं, नई सराय, चांदुवाड़ा व माली टिब्बा सहित कई मोहल्लों में नालों की सफाई पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
वर्जन:
शहर में नालों की सफाई का कार्य सहज नहीं है हालांकि नालों की सफाई का ठेका हर साल नगर परिषद द्वारा दिया जाता है। परंतु इनकी नियमित सफाई होना जरूरी है, इसके लिए सरकार व प्रशासन को चाहिए की वह कर्मचारियों की भर्ती करें।
-राहुल सारवान, जिला प्रधान नपा सफाई कर्मचारी संघ, नारनौल
वर्जन:
सफाई व्यवस्था को लेकर अधिकारियों लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। सफाई में जहां-जहां कमी है उसे पूरा करवाया जाएगा। शहर के मोहल्लों में नालों व नालियों की नियमित हो इसके लिए कर्मचारियों की कमी तो है, इसको लेकर समय-समय पर भर्ती के लिए सरकार से मांग भी की जाती है।
-कमलेश सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद, नारनौल