नारनौल/मंडी अटेली। अटेली-नारनौल के बीच नई रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसका स्पीड ट्रायल 13 फरवरी को होने था जो अब 15 फरवरी को होगा। इस दौरान 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इंजन दौड़ाकर स्पीड ट्रायल किया जाएगा।
वहीं रींगस से खाटूश्याम तक 18 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन लगभग 254 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही है। इसके अलावा सीकर और रींगस स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य प्रगति पर हैं जिससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस परियोजना से क्षेत्र के हजारों दैनिक यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
इसी कड़ी में शेखावाटी में रेल संपर्क को बेहतर और सुदृढ़ करने के लिए रींगस-सीकर, 50 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण कार्य के लिए 470.34 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
इस दोहरीकरण से रींगस, सीकर और आसपास के क्षेत्रों में तीव्र नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही क्षेत्र का जयपुर और दिल्ली के मध्य बेहतर रेल संपर्क स्थापित होगा।
इस मार्ग के दोहरीकरण से लाइन क्षमता में बढ़ोतरी होगी व अधिक ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा साथ ही ट्रेनों की गति में भी वृद्धि होगी। रींगस से सीकर रेलखंड के दोहरीकरण से खाटूश्याम वाले वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप लाभ मिलेगा व उनकी यात्रा सुगम होगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जन संपर्क अधिकार अमित सुदर्शन के अनुसार रींगस-खाटूश्याम जी 18 किलोमीटर नई लाइन का कार्य 254 करोड़ रुपये की लागत के साथ किया जा रहा है। वहीं रींगस-सीकर, 50 किलोमीटर रेलखंड के दोहरीकरण कार्य के लिए 470.34 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की ओर से राजस्थान में रेल संपर्कों की कड़ी को सुदृढ़ करने के लिए राज्य के विभिन्न भागों में विशेष पहल की जा रही है।
श्रद्धालुओं का होगा सफर सुगम
महेंद्रगढ़ जिले व साथ में लगते राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र पर्यटन, सेना एवं शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। पिलानी एवं लक्ष्मणगढ़ की गिनती भारत के प्रसिद्ध शिक्षा क्षेत्रों के रूप में की जाती है। जहां एक ओर इस क्षेत्र के बगड़, बिसाऊ, चिराना, डूंडलोद, चिड़ावा, फतेहपुर, काजड़ा, महेनसर, नवलगढ़ स्थान अपनी सोने-चांदी की भित्ति चित्रों वाली हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं खाटूश्यामजी, सालासर, जीणमाता, शाकम्भरी माता के धार्मिक स्थल पूरे भारत में विशेष पहचान रखते हैं। आस्था के इन केंद्रों पर वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है।