सिहमा। क्षेत्र के दौंगड़ा अहीर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ पूरा नहीं होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
दौंगड़ा अहीर के अतिरिक्त आसपास के अन्य काफी गांवों में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए महेंद्रगढ़, नारनौल या फिर अटेली जाना पड़ रहा है। इससे लोगों को भारी परेशानी उठानी हो रही है। विभाग चाहे कितनी भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का वादा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत पर अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के वादे खोखले साबित हो रहे हैं। शेर सिंह, महेंद्र, विजय, रामोतार, सुनील कुमार, मनोज कुमार आदि ने बताया कि पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण गांव व आस-पास के गांवों के लोगों को आए दिन इलाज कराने के लिए या तो दूसरे शहरों में जाना पड़ता है या फिर निजी चिकित्सकों के हाथों लुटने पर विवश होना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अस्पताल लोगों के बेहतरीन इलाज करने के उद्देश्य खोला गया था, लेकिन आज तक सरकार ने इस अस्पताल में पूरा स्टाफ नहीं भेजा है। इसके कारण गांव व आसपास के गांवों के लोगों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर विवश होना पड़ रहा है।
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गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही ज्यादा परेशानी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण महिलाओं को डिलीवरी के लिए महेंद्रगढ़, कनीना, अटेली या नारनौल जाना पड़ता है। यही नहीं इस हॉस्पिटल में अचानक कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार या गर्भवती महिला इलाज करवाने के लिए आ जाए तो यहां एंबुलेंस की भी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इसके बाद भी आज तक इसकी और किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। कलवाड़ी, बेवल, भालखी दौगंडा जाट के ग्रामीणों से बात की तो लोगों ने कहा कि दौंगड़ा अहीर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उन्हें अच्छे इलाज की उम्मीद थी।
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लैब में उपकरण नहीं, डिलीवरी के लिए कमरा है पर संसाधन नहीं
यहां पीएचसी पर दो मेडिकल अधिकारी नियुक्त हैं, लेकिन एक ही डॉक्टर कार्यरत है। एक डेंटल सर्जन है, लेकिन डेंटल चेयर व अन्य उपकरण नहीं होने की वजह से कोई इलाज नहीं कर सकते। फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन डेपुटेशन पर हैं। रेडियोलोजी अधिकारी, नेत्र जांच सहायक, क्लर्क व सहायक, स्टेनो की नियुक्ति होनी चाहिए। लैब के लिए बनाए गए कमरे में लैब से संबंधित कोई उपकरण नहीं है। डिलीवरी के लिए कोई संसाधन नहीं है। यहां पर दो दिन आयुष विभाग के डॉक्टर बुधवार व शनिवार को आते हैं। आंखों के इलाज के लिए ना ही डॉक्टर है न सुविधाएं हैं।
वर्जन:
अस्पताल में जो मरीज आ रहे हैं उनका इलाज अच्छे से किया जा रहा है। इस अस्पताल में प्रति माह करीब 2000 ओपीडी रहती है। - डॉ. गौरव, मेडिकल ऑफिसर दाैंगड़ा अहीर।
फोटो संख्या:74- कुराहवटा रोड पर जाम लगाते कॉलोनीवासी--संवाद- फोटो : संवाद