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Mahendragarh-Narnaul News: पीली पत्तियां और काली किनारी को न करें नजरअंदाज, ग्वार में अंगमारी का संकेत

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महेंद्रगढ़। ग्वार की फसल में इन दिनों मौसम की नमी के कारण जीवाणु अंगमारी रोग का खतरा बढ़ गया है। यदि ग्वार की पत्तियां पीली पड़ने लगें और बाद में उनकी किनारी काली दिखाई देने लगे तो किसान इसे सामान्य न समझें। यह जीवाणु अंगमारी रोग का शुरुआती संकेत हो सकता है। समय पर इलाज नहीं होने पर पैदावार को नुकसान पहुंच सकता है।
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चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ग्वार में कीट एवं बीमारी प्रबंधन को लेकर आयोजित प्रशिक्षण में किसानों को इस रोग की पहचान और बचाव के तरीके बताए गए।
केंद्र के संयोजक डॉ. सत्यजीत ने बताया कि मौसम में नमी बढ़ने के कारण ग्वार में सफेद मक्खी, हरा तेला और जीवाणु अंगमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों से किसी भी रोग या कीट की सही पहचान के बाद ही दवा का प्रयोग करने की सलाह दी।
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डॉ. बीडी यादव ने बताया कि जीवाणु अंगमारी में शुरुआत में पत्तियां पीली होती हैं और बाद में किनारी काली पड़ जाती है। अधिक बारिश होने पर पत्तियों का बड़ा हिस्सा काला हो सकता है जिससे पैदावार प्रभावित होती है।
अंगमारी रोग से बचाव के सलाह
वैज्ञानिकों ने जीवाणु अंगमारी व फंगस रोग से बचाव के लिए 30 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी। पहला छिड़काव बिजाई के 40-45 दिन बाद और अगला 12-15 दिन के अंतराल पर करने को कहा।
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