महेंद्रगढ़ जिले का नाम बदलने को लेकर क्षेत्रवासियों ने आंदोलन की हुंकार भर दी है। रविवार को क्षेत्र के नांगल सिरोही, बुडीन, पाली, आकोदा, मालड़ा तथा राव तुलाराम चौक पर विभिन्न गांवों में ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक पर भी लोगों ने प्रदर्शन किया।
क्षेत्रवासियों ने कहा कि महेंद्रगढ़ पटियाला रियासत के समय का जिला है। हरियाणा जन्म के समय सात जिलों में से यह एक था। रेवाड़ी, चरखी दादरी आदि इसी जिले के हिस्से रहे हैं। इस जिले का अपना एक इतिहास रहा है। राजा महेंद्र सिंह के नाम पर ही जिले का नाम रखा गया है लेकिन यह सरकार यहां के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है। वो यहां के इतिहास को मिटाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें चाहे कितना ही बड़ा आंदोलन करना पड़े या कितनी ही कुर्बानियां देनी पड़े। वो इससे पीछे नहीं हटेंगे।
रविवार को सुंडाराम ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप मालड़ा ने रामलीला परिषद प्रांगण में पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महेंद्रगढ़ के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रही है। यह हम कदापि नहीं होने देंगे। सरकार जो जिले का नाम बदलने का प्रयास कर रही है उसको रोक दें। अगर सरकार नहीं मानती है तो उन्होंने आंदोलन की पूरी तैयार कर रखी है। संदीप मालड़ा ने आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला कहते कुछ ओर है और करते कुछ ओर हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग उनका अपना विभाग है। उन्होंने बताया कि 5 और 6 नवंबर को हरियाणा विधानसभा सत्र के दौरान उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने यह कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से जनगणना की वजह अधि सूचना जारी हो रखी है कि इस वजह से राज्य में जिले की सीमा या उसके नाम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है और न ही जिले का नाम बदला जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उनके इस बयान से पहले दूसरा रिमाइंड 29 अक्तूबर को उपायुक्त कार्यालय में आया था। उनके बयान के बाद 11 या 12 नवंबर को तीसरा रिमाइंडर उपायुक्त कार्यालय में आ गया था। क्या विभाग के अधिकारी उनको बिना भरोसे में लिए इतना बड़ा काम कर देते हैं? इतने बड़े मुद्दे पर विधानसभा में झूठी जानकारी दे रहे है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार दोनों शहरों को आमने सामने कर भाईचारा खराब करवाने का प्रयास कर रही है। इस क्षेत्र की जनता जागरूक हो चुकी है। इस सप्ताह के दौरान आंदोलन की पूरी योजना बना रखी है। वो विरोध प्रदर्शन के लिए 150 गांवों के संपर्क में हैं। जल्द ही हम बड़े प्रदर्शन भी शुरू करेंगे। अगर चंडीगढ़ जाना पड़ा तो वहां भी प्रदर्शन किया जाएगा। लेकिन महेंद्रगढ़ के इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी।