फोटो संख्या:57 कनीना राजकीय स्कूल में मौजूद विद्यार्थी व शिक्षक। स्रोत:संस्थान
कनीना। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान जिले के चयनित राजकीय विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड के शैक्षिक प्रभाव का आकलन करने के लिए जिलास्तरीय डिपस्टिक सर्वे कराया जा रहा है। सोमवार को कनीना के राजकीय कन्या विद्यालय में विषय विशेषज्ञ राजेश कुमार गुप्ता ने विद्यालय के प्राचार्य, अध्यापकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ डिजिटल बोर्ड के प्रभाव को लेकर विचार-विमर्श किया।
विद्यालय के प्राचार्य नरेश कौशिक ने बताया कि डिजिटल बोर्ड की स्थापना के बाद विद्यार्थियों की जटिल विषयों के प्रति समझ में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पहले जो विषय कठिन लगते थे अब वे सरल और रोचक बन गए हैं।
डिजिटल तकनीक से पढ़ाई न केवल आकर्षक बनी है, बल्कि विद्यार्थियों की रुचि भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल बोर्ड के प्रभावी उपयोग के लिए अध्यापकों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। विज्ञान अध्यापिका कल्पना ने बताया कि डिजिटल बोर्ड के माध्यम से विज्ञान विषय को 2डी मॉडल, चित्रों और कहानियों की सहायता से पढ़ाया जा रहा है।
एसएमसी सदस्य नरेश कुमार ने कहा कि विद्यालय में डिजिटल बोर्ड का सकारात्मक और सार्थक उपयोग किया जा रहा है। भविष्य में एसएमसी बैठकों के माध्यम से विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी डिजिटल संसाधनों के सही उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा।
कक्षा दसवीं की छात्रा रवीना ने बताया कि डिजिटल बोर्ड आने के बाद गणित, सामाजिक अध्ययन और विज्ञान जैसे विषयों को पारंपरिक बोर्ड के साथ मिलाकर पढ़ाया जा रहा है जिससे विषय अधिक स्पष्ट हो जाते हैं।