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डाइट के विद्यार्थियों ने जाम लगाकर पुतला फूंका

Sat, 29 Oct 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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छात्र-छात्राओं ने हाईवे जाम कर विरोध जताया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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राव तुलाराम चौक पर शुक्रवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) के शिक्षक छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य पर समस्याओं का समाधान नहीं करने का आरोप लगाकर उनका पुतला फूंक जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षक छात्र-छात्राओं ने राव तुलाराम चौक पर करीब आधा घंटा नारनौल-चरखी दादरी स्टेट हाईवे जाम कर विरोध जताया।
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सूचना पाकर मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने आश्वासन देकर जाम खुलवाया। जाम के कारण हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी लाइनें लगी रहीं। इससे वाहन चालकों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डाइट की प्राचार्या का कहना है कि उनके पास कोई शिकायत नहीं आयी है। शिकायत आने पर ही समस्या का समाधान होगा।

शुक्रवार को डाइट के सभी छात्र और छात्रा शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर कक्षाओं का बहिष्कार किया। डाइट से प्रदर्शन शुरू करने के बाद सभी शहर के मुख्य बाजारों से होते हुए राव तुलाराम चौक पहुंचे। उन्होंने प्राचार्या मैडम संगीता यादव का पुतला फूंककर उनके खिलाफ नारेबाजी की।
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इस दौरान नारनौल-चरखी दादरी स्टेट हाईवे जाम कर दिया। इस कारण आधे घंटे जाम लगा रहा। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने सभी को समझाया और उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम खुला।

क्या कहते हैं शिक्षक छात्र-छात्राएं
शिक्षक छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्राचार्या संगीता यादव शिक्षण अभ्यास (टीपी) में अपनी मनमानी चला रही हैं। उन्हें शिक्षण अभ्यास के लिए दूर-दूर स्कूल दिए जा रहे हैं। जो शिक्षक छात्र-छात्राएं चरखी दादरी के हैं उनको नारनौल की तरफ और नारनौल की तरफ वालों को चरखी दादरी के सेंटर दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। डाइट में अलवर, चरखी दादरी, झुंझुनू, कोटपुतली, धारुहेड़ा, दिल्ली तक के छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण लेने आते हैं। हॉस्टल होने के बाद भी उन्हें सुविधा नहीं दी जा रही। प्राचार्या को इसकी कई बार शिकायत लिखित रूप से की जा चुकी है। उसके बाद भी इसका कोई असर नहीं हो रहा है।

क्या है टीपी
टीपी का पूरा नाम टीचिंग प्रैक्टिस है। हिंदी में इस शिक्षण अभ्यास कहा जाता है। एससीआरटी छात्र-छात्रा शिक्षकों को ट्रेनिंग के दौरान 20 दिन के लिए सरकारी स्कूलों में भेजकर शिक्षण अभ्यास करवाया जाता है ताकि भविष्य में उनको अध्यापन में कोई परेशानी न हो। एससीआरटी द्वारा डाइट प्राचार्या को जारी पत्र में स्पष्ट लिखा है कि कोई राजकीय प्राथमिक पाठशाला संस्थान के आठ किलोमीटर दायरे में स्थित है तो उससे बाहर शिक्षण अभ्यास करवाने का कोई औचित्य नहीं है।  

हॉस्टल बनने के बाद अभी तक नहीं आया है वार्डन
नीरज, पूजा, नेहा शिक्षक छात्राओं का कहना है कि महेंद्रगढ़ की डाइट करीब 20 वर्ष पहले बनी थी। डाइट बनने के दो वर्ष बाद ही सरकार ने छात्राओं की सुविधा के लिए हॉस्टल बनवाया था। उस हॉस्टल में एक साथ 70 के करीब छात्राएं रह सकती हैं। आज तक उस हॉस्टल को चालू ही नहीं किया गया है क्योंकि जब से हॉस्टल बना है तब से डाइट में हॉस्टल वार्डन ही नहीं आई है। हर वर्ष दूर दराज की शिक्षक छात्राओं को किराये पर कमरा लेकर रहना पड़ता है। इससे उनको आर्थिक नुकसान हो रहा है। शिक्षक छात्राओं ने मांग की है कि जल्द से जल्द हॉस्टल में महिला वार्डन रखकर उसे शुरू किया जाए।

वर्जन:
मैं धारूहेड़ा से रोज आवागमन करता हूं। कई बार गाड़ी लेट हो जाने के कारण डाइट समय पर नहीं पहुंच पाता। इससे उसकी कक्षा में गैरहाजिरी लगा दी जाती है। ब्वाय हॉस्टल की यहां सुविधा नहीं है। इसके अलावा अभी उनका टीपी सेंटर भी दूर देकर मैडम मनमानी कर रही हैं। - नितेश धारुहेड़ा

मैं दिल्ली पालम का निवासी हूं। महेंद्रगढ़ डाइट से जेबीटी कर रहा हूं। शहर में एक कमरे में रह रहा हूं। मुझे खाना आदि स्वयं बनाना पड़ता है। कभी कभार डाइट में पांच मिनट भी देरी से पहुंचता हूं तो मेरी गैर हाजिरी लगा दी जाती है। अब टीचिंग प्रैक्टिस के लिए सेंटर दूर दे दिया गया। जबकि होना यहीं चाहिए।  - हितेश

मैं भिवानी लोहारू शहर से हूं। उसका शहर महेंद्रगढ़ से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर है। लड़कियों का हॉस्टल भी यहां है लेकिन उसको शुरू नहीं करवाया जा रहा। उन्हें हर रोज आने जाने में काफी परेशानी होती है। - नीरज

प्राचार्या मैडम छात्र और छात्रा शिक्षकों के प्रति काफी कठोर हैं। उन्हें ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे बच्चे मानसिक रूप से परेशान रहने लगे। मैडम को हॉस्टल के बारे में कई बार शिकायत कर चुके हैं। उसकी आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। - नेहा

वर्जन:
मैंने बच्चों के हित के लिए व्यवस्था बनाई है। हमें अपने दायरे में रहकर ही काम करना पड़ता है। उससे बाहर मैं नहीं जा सकती। उनके पास कोई शिकायत ही नहीं आई है। अगर बच्चों को परेशानी थी तो वे उनको शिकायत देें तभी कोई कार्रवाई की जाती। - संगीता यादव, प्राचार्य, डाइट
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