उचाना। लाला प्रभुदयाल चौधरी धर्मशाला में चल रही सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। संध्या आरती पर भगवान शिव के जयकारों और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथावाचक अरविंद शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि शिव महापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान का भंडार है। भगवान शिव अत्यंत भोले और दयालु है। सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास से की गई उनकी आराधना कभी निष्फल नहीं जाती। जो भक्त शिव नाम का स्मरण करता है उसके जीवन के दुख, कष्ट और संकट स्वत: दूर होने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि सावन मास भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस माह में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा शिव महापुराण का श्रवण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा के माध्यम से उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्श दांपत्य जीवन, भक्ति, सेवा, त्याग, सत्य और धर्म के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
शास्त्री ने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सदाचार, संयम, सेवा और परोपकार की भावना अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति जीवन में सदैव सुख, शांति और सफलता प्राप्त करता है। कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा समाप्ति के बाद सभी श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आरती में भाग लिया तथा प्रसाद ग्रहण किया।
फोटो 07जेएनडी21-कथा वाचक अरविंद शास्त्री।