नारनौल। गांव हुडीना में लंपी रोग से गाय की मौत के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने जिले में निगरानी और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है। विभाग के अनुसार एक सितंबर तक करीब 60 हजार पशुओं का लंपी से बचाव के लिए टीकाकरण किया जा चुका है।
अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए केवल वैक्सीनेशन पर्याप्त नहीं है। संक्रमित पशुओं की समय पर पहचान कर उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग रखना भी जरूरी है, ताकि बीमारी का प्रसार रोका जा सके।
महेंद्रगढ़ जिला तीन ओर से राजस्थान की सीमा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पड़ोसी राज्य से भी लंपी संक्रमण आने की आशंका बनी रहती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं की खरीद-फरोख्त से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। इसे देखते हुए विभाग ने सीमा से सटे गांवों में निगरानी बढ़ा दी है और पशुपालकों को संक्रमित पशुओं को तुरंत अलग रखने की सलाह दी है।
ये सावधानियां बरतें
-बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
-शरीर पर गांठ, बुखार, सुस्ती या भूख कम होने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना दें।
-पशुओं के रहने की जगह साफ रखें और मक्खी-मच्छरों की रोकथाम करें।
-बाहर से आने वाले नए पशुओं को टीकाकरण के बाद ही झुंड में शामिल करें।
उबालकर पी सकते हैं दूध
नारनौल के पशु चिकित्सक डॉ. सुभाष के अनुसार थनेला जैसे कुछ रोगों में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि हल्के बुखार, दस्त, सर्दी-जुकाम और लंपी रोग की स्थिति में दूध को अच्छी तरह गर्म या उबालकर सेवन किया जा सकता है। इससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं रहती।