नारनौल। अप्रैल व मई में बुआई की जाने वाली फसलें कपास, चारे की फसल, ग्रीष्म मूंग इत्यादि में हल्की सिंचाई शाम के समय में ही करें व कपास की फसल की बिजाई 10 मई तक अवश्य पूर्ण कर लें।
उप कृषि निदेशक डाॅ. देवेन्द्र सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि गर्म मौसम की वजह से बीज के जमाव में होने वाले नुकसान से बचने के लिए बीज की दर 25 प्रतिशत बढ़ा दें। खरीफ 2024 में बुआई की जाने वाली फसलें जैसे बाजरा व ग्वार की बिजाई मानसून आने पर ही करें। इसके साथ-साथ कपास की बिजाई से पहले गांवों में व खेत के आस पास रखी हुई पुरानी कपास की बनछटियां लकड़ियों को झाड़ कर खराब टिंडे व अध खिले टिंडे को एकत्रित करके नष्ट करे दें। इससे कपास की फसल में गुलाबी सुंडी के प्रकोप को कम से कम किया जा सकता है।