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Mahendragarh-Narnaul News: बोझ नहीं, बेटियां बदलाव की पहचान...समाज को दिखाई शिक्षा की राह

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फोटो नंबर- 14महिला दिवस के अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान उप​स्थित महिलाएं। संवाद
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नारनौल। पहले के समय में बेटियों के जन्म पर घरों में खुशी के बजाय मायूसी का माहौल बन जाता था। वहीं उनकी मां के स्नेह और पिता के संस्कारों ने उन्हें शिक्षा की राह पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इससे उन्होंने जीवन में नई ऊंचाइयों को हासिल किया।
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यह बात अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य ने डॉ. कृष्णा आर्या ने कही। कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं से जुड़ीं और विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त महिलाओं ने भाग लिया। सभी महिलाओं ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए और समाज में महिलाओं को आने वाली चुनौतियों व परेशानियों पर खुलकर चर्चा की।
शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त प्राचार्य गीता बाई ने कहा कि उनके गांव में लोगों का मानना कि लड़कियों को पढ़ाना जरूरी नहीं है लेकिन उनके पिता ने समाज से अलग सोच रखते हुए उन्हें पढ़ाया और नौकरी लगने के बाद जब आत्मनिर्भर बन गई तब 21 वर्ष की आयु में शादी की।
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सरोज कश्यप ने बताया कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को सफलता की अभी लंबी दूरी तय करनी बाकी है जिसमें महिलाओं का एक दूसरे के लिए सहयोग जरूरी है। इस अवसर पर अनिता, कुमकुम, सावित्री संघी, रेणु और हेमलता सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रही।
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आज महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने के साथ परिवार को भी संभाल रहीं हैं। हालांकि आज भी सशक्त महिलाओं की संख्या बहुत कम है जो महिलाएं मुख्य धारा से दूर है, उन्हें सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी है। -डॉ. राजवती यादव, जिला अध्यक्ष, महिला कांग्रेस
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महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देश की प्रगति में योगदान दे रही हैं। यह संतोष की बात है कि सभी के सहयोग से समाज में धीरे-धीरे सकारात्मक वातावरण बन रहा है। जहां महिलाएं व दिव्यांग महिलाएं भी सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों के साथ आगे बढ़ रही हैं।-श्वेता साह, एडमिनिस्ट्रेटर, एसएम पुनर्वास एवं अनुसंधान केंद्र
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जीवन की कठिन परिस्थितियों में बेटियों ने हमारे घर को संभाला और जीवन में एक नई उम्मीद जगाई। हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं है, आधुनिक समय में ऐसा कोई काम नहीं जो महिलाएं नहीं कर सकती। मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है।
-अरुणा जांगड़ा, मोहल्ला सुभाष पार्क
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पुराने समय में मेरी शादी केवल 8 साल की उम्र में कर दी गई थी, उस समय मैं तीसरी कक्षा में पढ़ती थी लेकिन शादी के बाद मेरे ससुर व पति ने मुझे आगे पढ़ाया और सपनों को पूरा करने में साथ निभाया। -सुलोचना, मोहल्ला दयानगर
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