महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ जिले में मांग के अनुरूप किसानों को महज 50 प्रतिशत ही डीएपी खाद उपलब्ध हो पाई है। महेंद्रगढ़ जिले में खाद-बीज के 80 सरकारी केंद्र हैं। स्थिति यह है कि पिछले तीन दिन से इन केंद्रों पर डीएपी का स्टॉक खत्म है।
कृषि विभाग की ओर से प्रदेश सरकार को रबी फसलों की बिजाई के लिए अक्तूबर से मार्च माह तक कुल 17200 एमटी (मीट्रिक टन) खाद की मांग भेजी गई थी, लेकिन अभी तक इस मांग के अनुरूप महज तीसरे हिस्से का खाद ही उपलब्ध हो पाया है। अक्तूबर व नवंबर के लिए 11870 एमटी खाद की आवश्यकता जिला के किसानों को थी इसकी मांग भी सरकार को कृषि विभाग ने भेजी गई थी।
पिछले तीन सालों से किसानों को खाद के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकारी खाद बिक्री केंद्रों पर खाद आते ही किसानों की भीड़ उमड़ पड़ती है। अक्तूबर व नवंबर माह के दौरान 11870 एमटी खाद की आवश्यकता थी लेकिन इस मांग का भी आधा खाद ही महज 5012 एमटी उपलब्ध हो पाई है। कृषि विभाग की ओर से जिले के लिए 17200 एमटी (मीट्रिक टन) डीएपी खाद की मांग रबी सीजन की फसलों की बिजाई के लिए की गई थी। अब तक 5012 एमटी डीएपी उपलब्ध हो पाई है।
नैनो डीएपी व यूरिया से किसानों पर पड़ती है दोहरी मार
हालांकि निजी खाद-बीज बिक्री केंद्रों पर कंपनियों की नैनो डीएपी व नैनो यूरिया खाद उपलब्ध है। लेकिन इनकी कीमतों में कम अंतर होने के कारण किसान छिड़काव पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को लेकर इसकी ओर रूझान कम है, क्योंकि छिड़ाव के लिए भी स्प्रै मशीन किराए पर लेनी पड़ती है। अगर किसान ट्रैक्टर मशीन से छिड़काव करवाता है तो उस पर खर्च की दोहरी मार भी पड़ती है। हालांकि किसानों ने सरसों बिजाई में डीएपी की कमी के कारण एनपीके खाद को विकल्प के रूप में अपना लिया था, लेकिन सरकारी गोदामों पर जरूरत के अनुसार उपलब्ध नहीं हो पाया।
जानें... कृषि विभाग ने कितनी भेजी थी मांग, कितनी हो पाई उपलब्ध
माह भेजी गई मांग उपलब्धता कमी
अक्तूबर 5910 2450 3460
नवंबर 5960 1676 4284
दिसंबर 4670 - -
जनवरी 220 - -
फरवरी 220 - -
मार्च 220 - -
कुल 17200
जिले में 365200 एकड़ है बिजाई का रकबा:
फसल का नाम एकड़
सरसों 2.70 लाख
गेहूं 75 हजार
चना 12 हजार
दलहनी फसल 2500 एकड़
जौ 700 एकड़
अन्य 5000
कुल 365200
कृषि विभाग की ओर से प्रदेश सरकार को रबी सीजन की फसल बिजाई के लिए माहवार आवश्यकता की रिपोर्ट बनाकर भेजी थी। समय-समय पर किसानों को उपलब्धता के आधार डीएपी का वितरण भी किया जा रहा है। विभाग की ओर से अक्तूबर से मार्च माह तक डीएपी की मांग भेजी हुई है। किसानों को उपलब्धता के आधार पर खाद का वितरण किया जा रहा है।
- डॉ. अजय यादव, उपमंडल अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग महेंद्रगढ़।