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राहत: कोरोना के गंभीर मरीजों को मिलेगी सिटी स्कैन की सुविधा

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कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहले की अपेक्षा काफी घातक साबित हो रही है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग कोरोना के गंभीर मरीजों का सिटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराएगा। जिससे मरीज का सही उपचार हो सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग निजी लैब संचालकों से अनुबंध करने जा रहा है। दूसरी ओर बाजार से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के पास अभी रेमडेसिविर उपलब्ध नहीं है।
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बता दें कि जिले में अप्रैल से कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कोरोना का कहर शहर से लेकर गांवों तक फैल चुका है। हालांकि जिले में 13 मरीजों के अलावा अन्य मरीज घर होम आइसोलेट या कुछेक मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। डॉक्टरों का मानना हैं कि पहले की अपेक्षा इस बार कोरोना वायरस ज्यादा धातक हो गया है। इससे मरीजों में ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ रही है। हालांकि नारनौल में अभी ऑक्सीजन की समस्या नहीं है। लेकिन, जिस प्रकार से मरीजों की संख्या बढ़ रही है और अन्य जगहों पर ऑक्सीजन की मांग को देेखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्क है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार पिछले साल बहुत कम मरीजों की ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी। लेकिन, इस साल ऐसा नहीं है। ऐसे में इस बार मरीजों की फेफड़ों की सिटी स्कैन जरूरी हो गया है। जिससे यह पता चल सके कि कोरोना से कितना फेफड़ों का नुकसान हुआ है।
कोविड-19 केयर सेंटर के प्रभारी डिप्टी सीएमओ डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि सरकारी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को सिटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए स्थानीय सिटी स्कैन करने वाले लैब से कोटेशन मांगा गया है। इसके बाद कम वाले रेट के लैब के साथ अनुबंध किया जाएगा। कोविड-19 केयर सेंटर में भर्ती और जरूरतमंदों को यह सेवा डॉक्टरों की सलाह के बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
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सिटी स्कोर
कोरोना के गंभीर मरीजों के फेफड़ों का सिटी स्कैन भी कराया जाता है। इसमें जैसे-जैसे स्कोर बढ़ता जाता है मरीज गंभीर होने लगता है। यानि जितना स्कोर बढ़ता हैं, उतना ही फेफड़े प्रभावित होते हैं। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है। यह जानने के लिए सिटी स्कैन कराया जाता है। सिटी स्कैन में स्कोर 8-से कम है तो हल्का, 9-17 के बीच मध्यम और 17 अधिक स्कोर होने पर गंभीर माना जाता है।
वायरल लोड
कोरोना के मरीजों में वायरल की शिकायत रहती है। इसमें यदि वायरल का स्कोर कम है तो ज्यादा वायरल का लोड है। यानी की वायरस संक्रमण ज्यादा है। स्कोर ज्यादा तो वायरल का लोड कम है। 17-24-हाई वायरल लोड, 24-35- मध्यम वायरल लोड व 35 से अधिक माइल्ड वायरल लोड होता है।
बाजार से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक नहीं है रेमडेसिविर
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मरीजों को रेमडेसिविर की जरूरत पड़ रही है। नारनौल में भी यह दवा बाजार से लेकर सरकारी स्टॉक में नहीं है। अमर उजाला की टीम ने शहर के दस दुकानों से रेमडेसिविर के बारे में जानकारी ली। मेडिकल स्टोर संचालकों ने बताया कि यह उनके पास दवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि इमरजेंसी बताने पर एक स्टोर संचालक ने गुरुग्राम से मंगाकर दस हजार रुपये में देने की बात कही। वहीं जिला स्वास्थ्य विभाग के पास भी अभी रेमडेसिविर उपलब्ध नहीं है। इसके लिए डिमांड भेजी गई है। हालांकि पिछले इस दवा की जरूरत नहीं पड़ी थी और स्टोर में रखी रह गई थी।
कोविड-19 केयर सेंटर के गंभीर मरीजों को सिटी स्कैन की सुविधा जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। इसे लेकर प्रक्रिया चल रही है। सेंटर में 13 मरीज भर्ती है। सेंटर में ऑक्सीजन व बेड उपलब्ध है।
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डॉ. हर्ष चौहान, डिप्टी सीएमओ नारनौल
रेमडेसिविर की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद हैं कि दो-तीन दिन में उपलब्ध हो जाएगी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देेखते हुए जरूरी कमद उठाए जा रहे हैं।
डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ नारनौल
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