म्हारा गांव जगमग गांव योजना के तहत विधायक द्वारा गोद लिए गए 132 केवी सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति कम मिलने से नाराज सेका गांव के ग्रामीणों ने सब स्टेशन पर ताला जड़ दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। ग्रामीणों ने सब स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों के तबादले की मांग भी की। तालाबंदी की सूचना पाकर अधिकारी मौके पर पहुंचे। मगर ग्रामीणों ने ताला नहीं खोला। आखिरकार एडीसी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने ग्रामीणों से सात दिनों के अंदर 90 फीसदी बिजली बिल भरने के बाद पूरी बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने ताला खोल दिया। उधर 132 केवी सब स्टेशन पर तालाबंदी के चलते 33 केवी के पांच सब स्टेशन भी बंद रहे, जिसके चलते 50 गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित रही।
सुबह 9 बजे लगाया ताला
सेका गांव के ग्रामीण सुबह 9 बजे 132 केवी सब स्टेशन पर एकत्रित हुए और निगम व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। साथ ही ग्रामीणों ने सब स्टेशन पर भी ताला लगा दिया। तालेबंदी की सूचना मिलते ही निगम के जेई सतीशचंद व एसडीओ हनुमान मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौके पर ही ग्रामीणों की समस्या सुनी और उनका समाधान कराने का आश्वासन दिया।
मगर ग्रामीणों ने जेई व एसडीओ की एक न सुनी व उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने पर अड़ गए। बाद में मौके पर सदर थाना एसएचओ साधुराम दलबल सहित पहुंचे और उन्होंने भी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। जानकारी मिलने पर तहसीलदार ईश्वरचंद मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को काफी समझाया।
मगर ग्रामीणों ने तहसीलदार की भी नहीं मानी व निगम के उच्चाधिकारियों या उपायुक्त के आने और उनकी समस्या का समाधान हो जाने के बाद ही तालाबंदी खोलने की बात कही। इसके बाद मौके पर एक्सईएन अविनाश यादव पहुंचे, जिस पर ग्रामीणों ने उनके सामने अपनी समस्या रखी।
ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद एक्सईएन ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन ग्रामीण नहीं माने और अपनी मांगों पर अडिग रहे। शाम साढ़े पांच बजे एडीसी आरएस वर्मा वहां पहुचे। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति लेने के लिए उस गांव के कम से कम 90 फीसदी बिजली बिलों का भुगतान होना चाहिए। अगर ग्रामीण सात दिनों के अंदर बकाया बिजली बिल भर देते हैं, उन्हें पहले 18 व बाद में 22 घंटे बिजली सप्लाई मिलनी शुरू हो जाएगी।
यह कहना है ग्रामीणों का
ग्रामीण मनोज सेकवाल, रामेश्वर, मास्टर रोहताश, महीपाल, राजाराम, सतबीर, भूपसिंह, धर्मवीर, सतपाल, राजेंद्र, रामबिलास, बिमला, माया, रामरति, प्रेमलता आदि ने बताया कि निगम ने कांग्रेस सरकार के शासनकाल में एक स्कीम के तहत गांव सेका में पावर हाउस बनाया था।
उस समय निगम ने लिखित रूप से ग्रामीणों को उक्त पावर हाउस के लिए जमीन देने के बदले 18 घंटे बिजली देने का वादा किया था। इसके बाद भाजपा सरकार बनने पर इस पावर हाउस को सरकार की नई योजना म्हारा गांव जगमग गांव के तहत शामिल किया गया, जिसके तहत गांव में बिजली 20 से 22 घंटे दी जानी थी। मगर यहां के ग्रामीणों को इस समय मुश्किल से बिजली 12 से 15 घंटे ही मिल रही है।
ये थीं ग्रामीणों की मुख्य मांगे
-कम से कम 20 से 22 घंटे बिजली दी जाए
-11 हजार वॉल्टेज के तारों को कसा जाए
-कई खेतों में तार लटक रहे हैं, उन्हें सही किया जाए
-सब स्टेशन पर तैनात स्टाफ को बदला जाए
पांच पावर हाउस को होती है बिजली सप्लाई
इस 132 केवी सब स्टेशन के अंडर पांच सब स्टेशन के हैं, जिनसे 50 गांवों को बिजली सप्लाई की जाती है। ये पांच सब स्टेशन ढाणी बाठोठा,,धौलेड़ा, भुंगराका, शोभापुर, भीलवाड़ा में बने हुए हैं। 132 केवी सब स्टेशन पर तालाबंदी के चलते दिनभर इन 50 गांवों में बिजली सप्लाई नहीं हो सकी।
गांव की ओर बकाया है 4.50 लाख
म्हारा गांव जगमग गांव योजना के तहत 90 प्रतिशत लोगों के बिजली बिल जमा होने चाहिए, मगर इस गांव पर अभी 4.50 लाख रुपये के बिजली बिल बकाया हैं। जिसके कारण गांव को 22 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही। वहीं गांव लोगों का कहना है कि इस गांव के 95 प्रतिशत लोग हर माह बिल भरते हैं।