गांव आकोदा में पुलिस चौकी शुरू किए जाने का ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने सीएम मनोहरलाल को पत्र लिखकर चौकी को गांव से हटाए जाने की मांग की है। चौकी हटवाने की मुहिम को गांव के तीन पंचों ने भी समर्थन दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि चौकी को यहां से हटाया जाए।
गांव आकोदा में मंगलवार से पुलिस चौकी दोबारा से शुरू की गई थी। एक दिन बाद ही गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। आकोदा के ग्रामीण बुधवार को बस अड्डा के पास एकत्र हुए, जिसमें फैसला लिया कि चौकी को गांव से हटाने की मांग को लेकर अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सीएम मनोहरलाल को पत्र लिखा। गांव के लोग इस मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक से मिलेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव के बाहर जिला की सीमा पर एक नाका ही बहुत है। यहां चौकी की जरूरत नहीं है। गांव के कुछ लोग चौकी के जरिये राजनीति करते हैं। कुछ लोगों का चौकी में रहने वाली पुलिस पर प्रभाव है। यह लोग पुलिस को गुमराह करते हैं। गांव के लोग भाईचारा व प्रेम के साथ रहना चाहते हैं। ऐसे में यहां चौकी की जरूरत नहीं है। अगर पुलिस प्रशासन गांव में चौकी रखना ही चाहता तो इसे गांव के बाहरी एरिया बणी में स्थापित किया जाए। जहां गांव ने चौकी के लिए जमीन उपलब्ध कराई हुई है। गांव आकोदा से चौकी हटने के बाद यहां कोई बड़ा अपराध नहीं हुआ। ओवरलोड डंपरों पर पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती। ग्रामीणों ने कहा गांव के विकास के लिए यहां अनाज मंडी, सब्जी मंडी की मांग की गई थी। गांव को चौकी नहीं विकास के प्रोजेक्ट चाहिए।
गांव में पुलिस चौकी की जरूरत नहीं है। गांव में अगर लोग भाईचारा के साथ रहना चाह रहें हैं तो पुलिस को सहयोग करना चाहिए। पुलिस ओवरलोड डंपरों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। भैंस चोरी के आरोपी अब तक पकड़े नहीं गए। गांव में विकास के प्रोजेक्ट लाए जाएं।
- छोटूराम, निवासी आकोदा
हमारे यहां अपराध की बड़ी वारदात नहीं हैं। ऐसे में यहां चौकी नहीं होनी चाहिए। पुलिस अधिकारी रिकार्ड जांच करें कि पिछले एक साल में यहां कुल कितनी एफआईआर हुई। चौकी यूनिवर्सिटी परिसर के आसपास बनाई तो अधिक बेहतर होगा।
- गंगाराम, पंच, आकोदा
चौकी को गांव से हटवाने के लिए हमने सीएम को लेटर लिखा है। इस मामले को लेकर एसपी से मिलेंगे। गांव में चौकी नहीं चाहिए। प्रशासन हमारी सड़कों का निर्माण कराए। जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सके। चौकी को गांव से बाहर ले जाया जाए।
- धर्मबीर, पंच, आकोदा
जिला प्रशासन को ग्रामीणों की राय जाननी चाहिए। केवल कुछ लोग ही गांव में चौकी स्थापित कराना चाहते हैं। हाइवे पर बसी अधिकतर दुकानों के मालिक गांव में चौकी नहीं चाहते। ग्रामीण भी चौकी को गांव से बाहर भेजने के पक्षधर हैं। बहुमत की बात स्वीकार होनी चाहिए।
अजीत उर्फ बबलू , पंच आकोदा
कुछ प्रभावशाली लोगों ने मुझ पर झूठ केस बनवाया था। करीब दस साल तक मैं अदालत के चक्कर लगाता रहा। हाईकोर्ट ने न्याय करते हुए मुझे बरी किया। मैं पीड़ित होने के कारण कह सकता हूं कि गांव में चौकी नहीं होनी चाहिए। गांव के ही कुछ लोग इसे अपनी मर्जी से चलाते हैं।
- अभिमन्यु, निवासी आकोदा
अपराध को रोकने के लिए पुलिस बल बनाया गया है। ऐसे में अलग-अलग स्थानों पर जरूरत के हिसाब से पुलिस थाने, चौकी स्थापित करती है। गांव में चौकी बनानी ही हो तो गांव के बाहरी हिस्से में पंचायती भूमि पर इसे बनाया जाए। चौकी की प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। ग्रामीणों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- धर्मबीर सिंह, रिटायर्ड इंस्पेक्टर, आकोदा