नगर पालिका महेंद्रगढ़ की एक जांच में एसडीएम से मुलाकात के बाद लघु सचिवालय से बाहर आते वार्ड पार्ष
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नगर पालिका क्षेत्र की सड़कों के लिए लगाए गए टेंडर मामले में शुक्रवार को एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने पार्षदों का पक्ष सुना। उप प्रधान रमेश बोहरा सहित आठ पार्षदों ने अपना पक्ष रखा। पार्षदों ने टेंडर आमंत्रित किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। पार्षदों ने कहा कि पालिका के नियमों के अनुसार टेंडर लगाए जाने से पहले उसका प्रस्ताव मंजूर कराना जरूरी होता है। इन कार्यों का प्रस्ताव सदन की बैठक में पास नहीं कराया गया है। दूसरी ओर नगर पालिका चेयरपर्सन ने 4 पेज का लेटर उपायुक्त को भेजा है। जिसमें 28 विकास कार्यों के टेंडर के लिए ली गई स्वीकृति का हवाला भी दिया। नगर पालिका सचिव तथा चेयरपर्सन अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे। एसडीएम ने इस मामले में सचिव व चेयरपर्सन को 6 जुलाई को पहुंचने के लिए दूसरा अवसर दिया है।
नगर पालिका की ओर से लगाए गए 28 टेंडर की शुक्रवार को जांच शुरू हुई। सुबह 11 बजे एसडीएम ने इस मामले में सुनवाई की। नगर पालिका के कार्यकारी सचिव राजाराम व चेयरपर्सन रीना गर्ग अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे। उपप्रधान रमेश बोहरा सहित 8 पार्षदों ने अपना पक्ष रखा। इन पार्षदों ने कहा कि हम नगर पालिका में विकास कार्यों के पक्षधर हैं। काम नियम के हिसाब से कराए जाएं। चेयरपर्सन, सचिव मिलीभगत कर मनमाने ढंग से टेंडर जारी कर रहे हैं। चेयरपर्सन ने विकास कार्यों के लिए प्राथमिकता मांगी थी। जिस पर पार्षदों ने 66 कार्यों की सूची सौंपी थी। जो सदन की बैठक में भी स्वीकृत किए जा चुुके हैं। जिन 28 कार्यों के लिए टेंडर लगाए गए हैं वह अधूरी लिस्ट है। उमसें कुछ खामियां हैं। इन कार्य के लिए प्रस्ताव भी मंजूर नहीं है। नगर पालिका सचिव राजाराम अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे। जिसके चलते रिकार्ड की जांच नहीं हो सकी। नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग भी नहीं पहुंची। एसडीएम विश्राम कुमार मीणा ने इस मामले की जांच में शामिल होने के लिए इन दोनों को एक और मौका दिया है। सोमवार 6 जुलाई को इन दोनों को बुलाया गया है।
यह था मामला
नगरपालिका ने करीब एक साल बाद 24 जून को 3.28 करोड़ रुपये की लागत के 28 ऑनलाइन टेंडर लगाए थे। शहर की प्रमुख सड़कों के लिए बीते वर्ष जून 2019 में भी टेंडर लगाए गए थे। जिन टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। अब पालिका ने 24 जून को शहर की सड़कों और नालों के 3.28 करोड़ रुपये से 28 ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए थे। एक जुलाई तक टेंडर भरे जाने थे। 3 जुलाई को टेंडर ओपन किए जाने थे। 8 पार्षदों ने टेंडर को लेकर शिकायत दी। डीसी ने मामले की जांच एसडीएम को सौंपी। एसडीएम ने जांच पूरी होने तक टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
चेयरपर्सन ने लेटर में कहा सभी कार्यों के लिए कानून- नियम पूरे किए
नगर पालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने 4 पेज का लेटर डीसी को भेजा है। जिसमें उन्होंने कहा कि
नगरपालिका की ओर से प्रस्ताव नंबर 12 के तहत 19 अगस्त 2016 को 28 विकास कार्यों के अनुमान तत्कालीन कनिष्ठ अभियनंता/पालिका अभियन्ता से सचिव महोदय के माध्यम से बनवाये थे। जिनमें दस लाख से अधिक 16 कार्यों की तकनीकी स्वीकृति कार्यकारी अभियंता नगर परिषद नारनौल से ली गई थी। बकाया 12 कार्यों की तकनीकी स्वीकृति स्वयं पालिका अभियंता ने दी थी। 15 लाख तक के कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति नगरपालिका को है लिहाजा 22 कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति अधोहस्ताक्षरी द्वारा प्रदान की हुई है। 15 लाख से अधिक के 6 कार्यों की स्वीकृति सचिव ने पत्र क्रमांक 1183 दिनांक 07 नवंबर 2019 के तहत उपायुक्त कार्यालय से मांगी थी। तत्कालीन उपायुक्त ने दोनों तरफ से जवाब एवं सबूत लेने उपरान्त 6 विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति पत्र क्रमांक 2318 दिनांक 02 दिसंबर 2019 के तहत प्रदान की थी। चेयरपर्सन ने कहा उपायुक्त/उप मंडल अधिकारी बगैर शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव से स्वीकृति लिए बिना नगर पालिका के कार्यों के खिलाफ कोई भी जांच नहीं कर सकते हैं। उपायुक्त /उप मंडल अधिकारी ने किस नियम व कानून के तहत इन टेंडर को खोलने व वर्क अलॉट करने की कार्यवाही को स्थगित करने का पत्र लिखा है। उस नियम व कानून का हवाला नहीं दिया है।