फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना आशंकित को 24 घंटे रखा अस्पताल में, उपचार के नाम पर बना दिया 38 हजार रुपये का बिल

विज्ञापन
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। जिले में निजी अस्पताल संचालक कोरोना संक्रमित मरीजों से जमकर लूट रहे हैं और बिल मांगने पर पक्का बिल भी नहीं दे रहे। केवल एक पर्ची पर लिखकर बता दिया जाता है। ऐसा ही मामला रविवार को महेंद्रगढ़ में सामने आया है। एक निजी अस्पताल संचालक ने कोरोना की आशंका जाहिर कर खुडाना बास निवासी 70 वर्षीय ज्ञानवति से 24 घंटे के 38 हजार रुपये ले लिए। जब मरीज के परिजनों ने बिल मांगा तो पक्का बिल देने से मना कर दिया। रविवार को ज्ञानवति का बेटा वीरेंद्र जब तीसरी बार बिल लेने के लिए आया तब भी उसे बिल नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में आगे कार्रवाई करेंगे।
विज्ञापन

वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उसकी मां ज्ञानवति कुछ दिनों से बीमार थीं, वह खाना नहीं खा रही थी। मुंह में छाले भी हो गए थे। मां को लेकर वो 4 मई को स्टेट हाईवे पर स्थित एक निजी अस्पताल में लेकर आए। उस समय चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमित होने की आशंका जाहिर की थी। इसके लिए सीटी स्कैन भी करवाया गया था। जिसमें मरीज का सीटी स्कैन स्कोर लगभग 9 था। चिकित्सक ने उनकी मां को एडमिट कर लिया और कोरोना का प्राइमरी इलाज शुरू कर दिया। एडमिट के दौरान 35000 रुपये, एक हजार रुपये टेस्टिंग तथा दो हजार रुपये दवाइयों के लिए थे। अगले ही दिन उन्होंने अपने मां को डिस्चार्ज करवा लिया था।
आरटी-पीसीआर रिपोर्ट आई नेगेटिव
वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी मां को अगले ही दिन डिस्चार्ज करवाकर आरटी-पीसीआर जांच करवाई। जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। अब उनकी मां एकदम स्वस्थ है और घर पर है।
विज्ञापन

स्टाफ कर्मचारी ने ऐसे बताया 36 हजार रुपये का बिल:
वीरेंद्र ने बताया कि वह उपचार का पक्का बिल लेने के लिए तीन बार उक्त निजी अस्पताल में जा चुका लेकिन उसे बिल नहीं दिया जा रहा। बिल के नाम पर 24 घंटे की दवाइयों का एक 15210 रुपये का बिल बनाकर दिया है। इसके अलावा 13 हजार रुपये ऑक्सीजन स्पोर्ट बेड तथा 8 हजार रुपये लेब टेस्टिंग के बताए। जिनका बिल न बनाकर साधारण पर्ची पर लिखकर दे रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि अस्पताल में न तो उसकी मां को ऑक्सीजन स्पोर्ट दी गई और न ही कोई जांच की। इसके अलावा दवाइयां केवल दो हजार रुपये की ही आई थी जिसके पैसे दिए जा चुके थे।
हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने के बाद हम अवश्य कार्रवाई करेंगे। इसके लिए एसडीएम साहब को भी वहां को कोविड अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनको भी वो शिकायत दे सकते हैं।
विज्ञापन

-अशोक कुमार, सिविल सर्जन नारनौल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें