कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने टेस्टिंग को और अधिक प्रभावशाली तरीके से लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत अब सामान्य अस्पताल के आपातकाल विभाग में कोरोना के लक्षण वाले मरीजों का रैपिड टेस्ट किया जाएगा। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो तुरंत उसका मरीज का उपचार शुरू किया जाएगा। मरीज अस्पताल में इलाज करवाना चाहे तो उसको दाखिल किया जाएगा अगर वह गांव के ही आइसोलेशन या घर में रहकर उपचार चाहता है तो उसको तुरंत मेडिकल किट दी जाएगी। उसकी निगरानी के लिए बाकायदा स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उसके संपर्क में रहेगी। जिले में आए दिन कोरोना के लगभग पांच सौ मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं। कई बार ऐसे भी मरीज होते हैं जिनके टेस्ट की रिपोर्ट आने में समय लग जाता है जिससे उसकी तबियत अधिक खराब हो जाती है। इसलिए विभाग ने निर्णय लिया है कि सामान्य अस्पताल के आपातकाल विभाग में आने वाले कोरोना के संदिग्ध मरीजों का रैपिड टेस्ट किया जाएगा। जिससे उसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द आए और मरीज को समय पर सही उपचार मिल सके।
प्रतिदिन हो रहे हैं 170 रैपिड टेस्ट
नारनौल सामान्य अस्पताल में इस समय लगभग 400 नार्मल टेस्ट जबकि 170 के लगभग रैपिड टेस्ट हो रहे हैं। फ्लू कार्नर पर टेस्ट करवाने वाले लोगों की लंबी कतार रहती है। अब आपातकाल से चिकित्सक पर्ची पर रैपिड टेस्ट लिख कर देंगे जिससे जल्द से जल्द कोविड मरीज की हालत का पता चल सके और सही समय पर उसका उपचार हो सके। खास बात यह भी रहेगी कि अगर मरीज पॉजिटिव मिलता है तो वह अपनी मर्जी से गांव में बने आइसोलेशन सेंटर या घर पर भी ईलाज ले सकता है। अगर वह ऐसा करता है तो तुरंत उसको मेडिकल किट दे दी जाएगी।
अभी तक आ चुके हैं लगभग 20 हजार पॉजिटिव मरीज
जिले में अभी तक लगभग बीस हजार पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। इनमें से 15 हजार ठीक भी हो चुके हैं। जहां पहले प्रतिदिन सात सौ तक पॉजिटिव केस आ रहे थे वहीं अब यह संख्या केवल चार सौ के आस पास एक सप्ताह से बनी हुई है। कोरोना के 4381 केस अभी भी एक्टिव हैं।
रैपिड टेस्ट की व्यवस्था की गई है। अगर मरीज पॉजिटिव मिलता है तो और वह ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखता है जहां पर आइसोलेशन सेंटर बना गए हैं। वहां के लिए हेड क्वार्टर टीम की सलाह पर आइसोलेशन सेंटर में रखा जाएगा। अगर वह घर रहना चाहे तो अकेले आइसोलेट करना होगा। क्योंकि आइसोलेशन सेंटर में ठहरने की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि उनके कारण उनके परिजनों को यह संक्रमण ना हो। यह प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में इस संक्रमण को रोकने में काफी सहायक सिद्ध होगी। यहां ठहरने वाले ग्रामीण को सरकार की ओर से स्वास्थ्य किट भी दी जाएगी ताकि वह जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ ले सके।
डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन, नारनौल।