नगर पालिका चेयरपर्सन रीना गर्ग ने हाईकोर्ट में कार्यकारी प्रधान तथा अन्य के खिलाफ दायर अवमानना केस को वापस ले लिया है। बहस के बाद चेयरपर्सन के अधिवक्ता गौरव मोहंता ने याचिका वापस ले ली। पार्षदों की ओर से अधिवक्ता दीपक जिंदल ने पैरवी की। वकील दीपक जिंदल ने कहा कि मामले यह भी स्पष्ट हो गया है कि तीनों पार्षदों की सदस्यता पर कोई रोक नहीं थी। केवल अविश्वास प्रस्ताव की बैठक पर रोक है।
सोमवार को हाईकोर्ट में नपा चेयरपर्सन की ओर से डाली गई सीओेसीपी 317/2020 अवमानना याचिका की सुनवाई थी। न्यायाधीश सुरेंद्र गुप्ता की अदालत में सुनवाई हुई। चेयरपर्सन की ओर से अधिवक्ता गौरव मोहंता ने कहा कि नपा पार्षद अमित मिश्रा, कमलेश तायल और नरेंद्र खन्ना का बैठक में शामिल होना गलत था। उन्होंने कोर्ट के आदेश की अवेहलना की है। इस पर न्यायाधीश ने जब पूछा कौन से आदेशों की अवहेलना की है तो अधिवक्ता मोहंता ने कहा कि एनपीएल नंबर 943 में जो पास हुआ था। जो अविश्वास प्रस्ताव की मीटिंग पर स्टे किया था। इस पर न्यायाधीश ने कहा कि यह तो अविश्वास प्रस्ताव मीटिंग पर स्टे था। यह अविश्वास प्रस्ताव की मीटिंग नहीं थी। कार्यकारी प्रधान की ओर से अधिवक्ता ने कहा कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव की मीटिंग पर रोक लगाई है। इनकी सदस्यता पर स्टे नहीं है। इसलिए वो किसी भी मीटिंग में भाग ले सकते हैं।
यह डाली थी याचिका
23 जनवरी को नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने हाई कोर्ट में नपा के कार्यकारी प्रधान रमेश बोहरा तथा अन्य के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना की याचिका लगाई थी। मामले में अन्य में सचिव नवल किशोर, अमित मिश्रा, नरेंद्र खन्ना तथ कमलेश तायल को पार्टी बनाया था। इसमें कार्यकारी प्रधान रमेश बोहरा के तीन बैठकों में पार्षद अमित मिश्रा, कमलेश तायल और नरेंद्र खन्ना को बैठक में बुलाया जाने को आधार बनाया था। यह बैठक नपा के कार्यकारी प्रधान रमेश बोहरा ने नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग के निलंबित होने पर 6 मार्च 2019, 5 अगस्त 2019 तथा 8 अगस्त 2019 को बैठकें बुलाई थीं। इन बैठकों में उक्त तीनों पार्षदों को बुलाया गया था। इसके अलावा 7 जनवरी 2020 की बैठक में सचिव ने तीनों पार्षदों को शामिल किया था। उन्होंने कहा कि यह हाई कोर्ट के 19 जून 2018 के आदेश की अवहेलना है।
हमने कोर्ट की अवहेलना की याचिका डाली थी। बेंच से वह हमने वापस ले लिया है। बेंच ने कहा कि कानून के अनुसार हम अन्य रेमिडी इसको वापस ले सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव की मीटिंग पर रोक है। साधारण बैठक की रोक का हमारे पास कोई मुद्दा नहीं आया है।
-गौरव मोहंता, अधिवक्ता चेयरपर्सन रीना गर्ग।
नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग ने पार्षदों के 7 जनवरी की बैठक में भाग लेने को गलत बताया था। इसकी उन्होंने हाई कोर्ट में कोर्ट के आदेश की अवहेलना की याचिका डाली थी। कोर्ट में सोमवार को कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की बैठक पर रोक है, उनकी सदस्यता पर रोक नहीं है। इसलिए वे बैठक में भाग ले सकते हैं। कानून के तहत चेयरपर्सन के अधिवक्ता को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी।
-दीपक जिंदल, अधिवक्ता, कार्यकारी प्रधान।