नारनौल। अदालत से बिजली चोरी के एक मामले में उपभोक्ता मोतीलाल को राहत नहीं मिली। नारनौल की सिविल जज निशा द्वितीय की अदालत ने उसका दीवानी वाद खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सिविल अदालत बिजली चोरी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
मोतीलाल ने दावा किया था कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने 1 मार्च 2023 को उसे फंसाया। उसने कहा कि विभाग ने बिना जांच झूठी रिपोर्ट बनाई थी। इसके आधार पर 5.19 लाख रुपये का आकलन और 1.50 लाख रुपये का कंपाउंडिंग नोटिस जारी हुआ।
वादी ने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया। अदालत ने चुनौती को बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 135 से संबंधित बताया। अधिनियम की धारा 145 के अनुसार सिविल अदालत का अधिकार क्षेत्र ऐसे मामलों में प्रतिबंधित है।