प्रदेश सरकार मरीजों को भले ही अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हैं लेकिन महेंद्रगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात कुछ अलग हैं। यहां न तो चिकित्सक हैं न ही मरीजों को मुफ्त में मिलने वाली दवाइयां। इतना ही नहीं प्रैग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली आयरन की गोलियां भी अस्पताल में नहीं हैं। अस्पताल में कुछ दवाइयों को छोड़कर मरीजों को बाकी सभी दवाइयां बाहर से लानी पड़ती हैं। पीसीएम, ए बेरा जोल तथा कुछ अन्य दवाईयों को छोड़कर कोई भी एंटी बॉयटिक दवाइयां भी अस्पताल में नहीं हैं। जबकि इस समय बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। भिवानी स्थित वेयरहाउस में भी दवाइयों का अभाव जिस कारण दवाइयां नहीं पहुंच पा रही। जबकि स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़ सीएमओ को मिलने वाले बजट से अपना काम चला रहा है।
वेयरहाऊस का स्टोक हुआ खत्म
सिविल अस्पताल के ड्रग्स इंचार्ज जसवंत सिंह ने बताया कि वेयरहाऊस भिवानी में ही दवाइयों का स्ट्रोक खत्म हो चुका है। वेयरहाऊस ही महेंद्रगढ़ सिविल अस्पताल को सप्लाई भेजता है। सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार बीमारियों की 370 दवाइयां मरीजों को अस्पताल से मुफ्त दी जाती हैं जिनमें से वेयरहाऊस में 110 ही दवाइयां हैं। बाकी दवाईयों मरीजों को बाजार से ही लेनी पड़ती है।
सीएमओ बजट से चलता है काम
हरियाणा सरकार ने अपने आम बजट 2015-16 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का 3028.61 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। बजट में लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने को लेकर जिक्र किया गया था। लेकिन यहां तक पिछले कई महीनों से दवाइयों की ही सप्लाई नहीं हो पा रही। पिछले कुछ महीनों से सीएमओ बजट से ही काम चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़ स्थानीय फार्मास्सिट से जरूरतमंद दवाइयां खरीद रहे हैं। बाकी बहुत सी दवाइयों तो लोगों बाहर से खरीदनी पड़ती है। अप्रैल माह में लगभग 4 लाख 62 हजार रुपये की तथा अगस्त माह में लगभग 5 लाख रुपये की दवाईयां स्थानीय फार्मासिस्ट से खरीदी गई थीं। इनमें सीरिंज, दवाईयां, लैब संबंधित सामान, तथा मरहम पट्टी का सामान शामिल है।
100 दिन का कोर्स जरूरी
सिविल अस्पताल में कार्यरत लेडी डाक्टर निशा यादव ने बताया कि आयरन की गोलियां 3 माह की गर्भवती महिलाओं को दी जाती है। सरकार के अनुसार इन गोलियों का कोर्स कम से कम 100 दिनों का होता है। जिन महिलाओं में खून कमी होती है उनके लिए यह कोर्स और भी बढ़ाया जा सकता है। ये गोलियां शरीर में हिमोग्लोबिन की मात्रा को पूरा करती है।
दो महीनों से नहीं है आयरन की गोलियां
गोलियां का स्टोक पिछले दो महीनों से खत्म हो गया है जबकि कुछ दवाईयां 5-6 महीने से खत्म हो रखी हैं। अस्पताल में हर रोज 100 गर्भवती महिलाएं जांच आदि के लिए आती हैं। उन्हें ये दवाईयां बाहर से लेनी पड़ती है। बाहर से दवाई का पता 45 से 50 रुपये का मिलता है। इसके अलावा कैल्शियम, एंटी बॉयटीक, एमोक्सी आदि दवाईयां भी खत्म बताई जा रही हैं।
ड्रग्स स्टोर इंचार्ज जसवंत ने बताया कि वेयरहाऊस में जितनी दवाईयां है वो सप्लाई हो रही हैं। कुछ दवाईयां बाजार से भी सीएमओ बजट से मंगवाई जा रही हैं।
विभाग की ओर से दवाइयों की खेप नहीं मिल पा रही है। इसके चलते इस तरह की दिक्कतें आ रही हैं। - डा. सुरेंद्र, एसएमओ, महेंद्रगढ़