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Mahendragarh-Narnaul News: एआई, जीनोमिक्स से विकसित होंगी जलवायु के अनुकूल फसलें

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फोटो संख्या:68 अनुदान मिलने पर विभागाध्यक्ष व शोधा​र्थियों को बधाई देते हकेंवि कुलपति प्रो. टंक
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतरराष्ट्रीय शोध के लिए 90.53 लाख रुपये का अनुदान मिला है। इसके तहत शोधार्थी बादल महाकालकर व पवन कुमार ऑस्ट्रेलिया में शोध करेंगे। एआई और जीनोमिक्स से ऐसी फसलें विकसित की जाएंगी जो बदलते मौसम और पर्यावरणीय दबाव को सहन कर सकें।
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यह परियोजना 1 जून 2026 से 31 मई 2028 तक चलेगी। इसका नेतृत्व जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. रूपेश देशमुख करेंगे। उनके साथ प्रो. हुमैरा सोनाह और डॉ. केशव सिंह रावत सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में काम करेंगे। इसे एग्री और फूड टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मंजूरी दी गई है।
फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन (स्पार्क) योजना के तहत विश्वविद्यालय की एक प्रतिष्ठित शोध परियोजना को स्वीकृति मिली है। इसका विषय जलवायु-अनुकूल फसल सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित फेनोमिक्स एवं जीनोमिक पूर्वानुमान है।
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प्रो. रूपेश देशमुख ने बताया कि इस शोध का मुख्य उद्देश्य एआई, फेनोमिक्स और जीनोमिक तकनीकों की मदद से ऐसी फसल किस्में विकसित करना है जो सूखा, गर्मी और अन्य तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। यह शोध भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने में मदद करेगा।

ऑस्ट्रेलिया में छह माह चलेगा शोध
इस परियोजना में यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के प्रो. सिगफ्रेडो फुएंटेस व डॉ. सजिथा बिजू भी शामिल हैं। हकेंवि से शोधार्थी बादल महाकालकर व पवन कुमार छह माह तक यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न में शोध कार्य करेंगे। यह अकादमिक आदान-प्रदान उन्हें उन्नत शोध सुविधाओं एवं विशेषज्ञता तक पहुंच प्रदान करेगा।

वैश्विक शैक्षणिक व शोध सहयोग को मिलेगा प्रोत्साहन
कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार और कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने परियोजना टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना वैश्विक शैक्षणिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय संकाय भ्रमण, छात्र विनिमय कार्यक्रम, कार्यशालाएं, शोध सामग्री और वैज्ञानिक प्रकाशन जैसी गतिविधियां होंगी। इससे शोध के नए अवसर मिलेंगे और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का विकास होगा।
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