कोविड-19 के कारण लागू लॉकडाउन में जिला अस्पताल की ओपीडी में गिरावट आई है। फरवरी में नए व पुराने मरीजों की ओपीडी 32055 थी, जो अप्रैल में 12605 रह गई। करीब एक तिहाई मरीज कम हुए। इस दौरान सर्जरी केस भी कम हुए हैं। लॉकडाउन के दौरान नागरिक अस्पताल में दस नए डॉक्टर मिले। इसके अलावा छह बेड का वेंटिलेटर युक्त आईसीयू वार्ड बनाया गया। जिससे इमरजेंसी में कोविड-19 के मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा जा सके। इस संक्रमण काल में सरकारी अस्पताल लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरे और लोगों को उपचार उपलब्ध कराते रहे।
महेंद्रगढ़ जिले में जिला नागरिक अस्पताल के अलावा एक उप नागरिक अस्पताल और छह सीएचसी सेंटर हैं। जहां पर मरीजों को उपचार होता है। नारनौल में जिला अस्पताल होने के कारण गांवों के अलावा राजस्थान से भी लोग उपचार कराने आते हैं। ऐसे में नागरिक अस्पताल में काफी मरीजों का काफी दबाव रहता है। नागरिक अस्पताल में रोजाना की ओपीडी 900-1200 के बीच रहती थी। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद 25 मार्च से देश में लॉकडाउन लागू हो गया। इससे नागरिक अस्पताल की हेल्थ सेवाएं भी प्रभावित हुई। बीच में बच्चों व गायनी के अलावा अन्य बीमारियों के मरीजों की ओपीडी भी बंद करनी पड़ी। 18 अप्रैल के बाद नागरिक अस्पताल समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर स्पेशल ओपीडी शुरू हुई। इसके लिए अलग-अलग दिन स्पेशल ओपीडी का इंतजाम कराया गया। जीएच के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि कोविड-19 में मरीजों के उपचार के दौरान काफी सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे अस्पताल की ओडीपी समेत अन्य सेवाओं पर भी कुछ प्रभाव पड़ा। उन्होंने बताया कि कोरोना के मरीजों की पहचान के लिए लॉकडाउन से पहले ही फ्लू कार्नर बनाकर मरीजों की स्क्रीनिंग शुरू की गई।
अस्पताल की ओपीडी में भारी गिरावट आई
नागरिक अस्पताल में नए और पुराने मरीजों की जनवरी में ओपीडी 26889 रही। फरवरी में 32055, मार्च में 26567 व अप्रैल में 12605 रही। न्यू ओपीडी जनवरी में 12670, फरवरी में 16809, मार्च में 15023 और अप्रैल में 7835 ओपीडी रही। नए व पुराने मरीजों की आईपीडी जनवरी में 3021, फरवरी में 3162, मार्च में 2659 व अप्रैल में 2735 रही।
इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ी
नागरिक अस्पताल में जनवरी में 173, फरवरी में 219, मार्च में 184 और अप्रैल में 267 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। इस दौरान जनवरी में 95, फरवरी में 152, मार्च में 139 व अप्रैल में 171 मरीजों की हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया। उपचार के दौरान जीएच में जनवरी में दो, फरवरी में पांच, मार्च में दो व अप्रैल में तीन की मौत हो हुई।
आपरेशन भी टालने पड़े
कोरोना काल के दौर जनवरी में 400 मरीजों का आपरेशन हुआ। फरवरी में 395, मार्च में 264, अप्रैल 120 मरीजों का आपरेशन हुआ। इसमें जनवरी में मेजर केस 382 व माइनर 18, फरवरी में मेजर 378 व माइनर 17, मार्च में मेजर 256 व माइनर आठ, अप्रैल में 119 मेजर व एक माइनर केस हुआ। इस दौरान आपरेशन करने में डॉक्टरों से विशेष सावधानी बरती।
लॉकडाउन में हर माह 400 बच्चे हुए पैदा
कोविड-19 में सबसे मुश्किल काम जच्चा-बच्चा वार्ड का है। नारनौल में स्थानीय के साथ राजस्थान के डिलिवरी केस आते हैं। अस्पताल के डॉक्टरों से सर्तकता बतरते हुए जच्चा-बच्चा वार्ड का काम जारी रखा है। जनवरी में 493, फरवरी में 495, मार्च में 462 व अप्रैल में 386 नार्मल डिलिवरी से बच्चे पैदा हुए। हालांकि जनवरी में सिजेरियन केस 148, फरवरी में 175, मार्च में 162 व अप्रैल में 117 हुए। इस दौरान महिला डॉक्टरों पूरी सावधानी बरतते हुए डिलिवरी केस किए।
छह वेंटिलेटर मशीने युक्त आईसीयू वार्ड मिला-
कोविड-19 के संक्रमित गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है। लेकिन, 200 बेड वाले नागरिक अस्पताल में यह सुविधा नहीं थी। इसे देखते हुए सरकार ने सात बेड के आईसीयू वार्ड बनाने का निर्देश दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू वार्ड तैयार करा दिया था। इसी बीच सिंघानिया यूनिवर्सिटी ने दो वेंटिलेटर उपलब्ध कराया था। इसके बाद कृष्णा देवी ने एक वेंटिलेटर भेंट किया था। प्रदेश सरकार से तीन वेंटिलेटर मिले। आईसीयू वार्ड में छह वेंटिलेटर हैं। इसमें एक मोबाइल वेंटिलेटर सिस्टम भी है। इसके आलावा पांच छोटे वेंटिलेटर हैं। यह जिले के लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा सकेगा।
सेंट्रलाइज्ड आक्सीजन चेंबर बना
कोविड-19 को लेकर नागरिक अस्पताल में सेल्ट्रलाइज्ड आक्सीजन चेंबर बनाया गया। इससे एक जगह से पाइप से ऑक्सीजन बार्ड में उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सिलिंडर से गैंस उपलब्ध कराने की समस्या कम हो गई। अब नए भवन में इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू के साथ मेडिकल वार्ड में यह सुविधा मिल गई है। इसे एक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
नागरिक अस्पतालत को 10 डॉक्टर मिले-
कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद सरकार ने लंबित डॉक्टरों की भर्ती को हरी झंडी दे थी। इससे अस्पताल में दस नए डॉक्टर मिले। जिला अस्पताल को 200 बेड के अस्पताल का दर्जा है। नागरिक अस्पताल नारनौल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं। इसमें से मार्च तक 18 कार्यरत थे जबकि 24 पद खाली था। कोरोना वायरस को देखते हुए दस डॉक्टरों ने ज्वाइंन किया। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। साथ ही कोविड-19 की जांच और मरीजों के देखलाभ में सहूूलियतें मिली है।
कोविड-19 को लेकर जीएच में आईसीयू वार्ड, आक्सीजन चेंबर और डॉक्टर मिले। इससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। पटीकरा स्थित बीकेएन मेडिकल कॉलेज व अस्पताल को कोविड-19 केयर सेंटर बनाया गया। इसे भी आपरेशन में लाया गया और जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया।
डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने से नागरिक अस्पताल में मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकेगी। दूसरा अस्पताल में आईसीयू वार्ड होने से गंभीर बीमारी के मरीजों का स्थानीय स्तर पर उपचार हो सकेगा। लॉकडाउन में गायनी व बच्चों की ओपीडी नियमित जारी रखी गई।
डॉ. राकेश कुमार, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल
आईएमए ने सरकार और सीएमओ के निर्देश पर काम किया। कुछ डॉक्टरों ने हेल्थ विभाग को सेवाएं दी। बीच में कुछ निजी अस्पताल सरकारी निर्देश से बंद रहे। संदिग्ध मरीजों के बारे में जानकारी हेल्थ विभाग को देे गई। आईएमए नारनौल ने कोविड-19 में हर स्तर पर सरकार की मदद की है।
डॉ. रोहताश यादव, अध्यक्ष आईएमए