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आढ़ती नियमों की कर रहे अवहेलना रविवार को भी बाजरे की पैकिंग कराई

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शहर की अनाज मंडी में रविवार को अवैध तरीकों से बाजरे की पैकिंग होतीी है। इसका उदाहरण रविवार को देखने को मिला। अमर उजाला टीम ने मंडी की पड़ताल की तो वहां पर एक ट्रैक्टर ट्राली में बाजरे के कट्टे रखे हुए थे। जहां पर लेबर उनको कट्टों को खोलकर बाजरा सीधा बारदाने में पैक कर रहा था। इस प्रकार के पहले भी कई बार नियमों की विरूद्ध बाजरे की पैकिंग होती रही। परंतु हैफेड या मार्केट कमेटी के अधिकारी कोई एक्शन नहीं ले रहे।
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खरीद अधिकारी शुभराम ने बताया कि वो सोमवार को संबंधित आढ़ती के पास जाकर इस बार में पूछताछ करेंगे और जो उन्होंने पास किया हुआ उतना ही बाजार वो लेंगे। उससे ज्यादा बाजरा वो नहीं ले सकते। नियमों मुताबिक रविवार को छुट्टी का दिन रहता है। इस दिन किसान की ओर से बेचे जानी वाली फसल मंडी के अंदर नहीं जा सकती। अन्य दिनों भी टोकन के माध्यम से ही उनकी गाड़ियों को अंदर जाने दिया जाता है। नियमानुसार किसान अपना बाजरा साथ लेकर आएगा। उसके बाद उतने ही बाजरे का टोकन कटेगा।
टोकन कटने के बाद किसान को मंडी के अंदर ढेरी लगानी पड़ती है और उसकी झारने से सफाई भी होती है। बाद में खरीद एजेंसी निर्धारित मापदंड अनुसार जांच करती है। अगर जांच में वही सही पाया जाता तो उसको पास कर दिया जाता है। उसके बाद उसकी पैकिंग और तुलाई होती है लेकिन यहां न तो ढेरी लगाई गई, न सफाई हुई और न ही जांच हुई। बाजरे को सीधा ही बारदाने में भर दिया गया जो कि नियमों के विरूद्ध है।
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जब हमने बाजरा पास कर दिया था और खरीद हो चुकी थी तो रविवार को बाजरा आया कैसे यह मेरी समझ से बाहर है। गाड़ियों को अंदर बाहर करना मार्केट कमेटी का काम है। अगर किसी आढ़ती का बाजरा कम रह गया तो वह सोमवार को ला सकता था। रविवार को इस प्रकार बाजरा नहीं ला सकते।
- शुभराम, खरीद अधिकारी।
यहां मैन पॉवर नहीं है। यहां चौकीदार तक नहीं है, केवल छोटी मैन पॉवर से काम निकाल रहे हैं। मैं बीमार चल रहा हूं। मैंने पता किया तो पांच सात कट्टे कम रह गए थे, वो कट्टे किसान लेकर आए थे। इतना तो किसानों का सहयोग करना ही पड़ता है।
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- सुंदर सिंह, कार्यकारी सचिव, मार्केट कमेटी, महेंद्रगढ़।
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