छह माह पहले पुराने सिविल अस्पताल की बिल्डिंग में शुरू किया गया तीस बेड का मातृ-शिशु अस्पताल में आज तक एक भी बेड नहीं पहुंचा है। इसके अलावा यहां स्टाफ व दवाइयों सहित अन्य सुविधाओं की कमी से मरीज परेशान हैं। यहां उपचार के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भी मुख्य उद्यम सिंह सिविल अस्पताल तक भाग-दौड़ करनी पड़ रही है। प्रतिदिन इस अस्पताल में 50 से 60 ओपीडी तो आ रही हैं लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते किसी को भी सरकार के दावों मुताबिक उपचार नहीं मिल पा रहा है।
शहर में एकमात्र जच्चा-बच्चा सिविल अस्पताल कागजों में तो अस्तित्व में आ गया है लेकिन धरातल पर जच्चा व बच्चा को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में स्टाफ की रिक्तियों की सूची कई माह पहले ही विभाग ने तैयार करवा ली थी लेकिन इस सूची के अनुरूप एक पद भी नहीं भरा जा सका है। पद ही नहीं शिशु-नर्सरी व अन्य लैब का सामान भी यहां अब तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं भेजा गया है। इस समय अस्पताल में एक ही चिकित्सक कार्यरत है और यहां प्रतिदिनि 50 से अधिक महिला व शिशु मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
कागजों में यह अस्पताल अपग्रेड हो चुका है और अस्पताल में एसएमओ का पद भी सृजित कर रखा है। पिछले काफी समय से शहर व आस पास के गांवों में मातृ शिशु अस्पताल नहीं था। इतना ही नहीं क्षेत्र में डिलीवरी की अव्वल दर्जे की किसी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं रही है। ऐसे में डिलीवरी संबंधी मामलों में चिकित्सा लापरवाही के चलते शिशु -मृत्यु दर पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता रहा है।
अब इस पुराने अस्पताल के जच्चा-बच्चा अस्पताल के अपग्रेड होने से शहर व आसपास के करीब सौ से अधिक गांवों को इस सुविधा का भरपूर फायदा मिलने की उम्मीद जगी है। यह पुराना सिविल अस्पताल शहर के बीचोबीच स्थित है। करीब दो दशक पूर्व इसी भवन में उद्यम सिंह जैन सिविल अस्पताल चल रहा था।
अस्पताल में ये पद हैं स्वीकृत
30 बेड के मातृ-शिशु अस्पताल में एसएमओ, सात चिकित्सक, आठ स्टाफ नर्स, एक डेंटल असिस्टेंट, एक चालक, एक पब्लिक नर्स, एक नर्सिंग सिस्टर, एक रेडियोग्राफर, दो फार्मासिस्ट, एक ओटीए, एक लैब टेक्निशियन, एक ऑर्थामिक असिस्टेंट, दो एकाउंटेंट असिस्टेंट, दो क्लर्क कम स्टोरकीपर, एक डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक स्टेनो टाइपिस्ट, 16 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पद स्वीकृत हैं। यह पद पत्र क्रमांक=20/49/2015-5 एचबी=3 के तहत गत 10 मई को सृजित हो चुके हैं लेकिन इन पदों पर अभी तक नियुक्ति नहीं की जा सकी है।
मूलभूत सुविधाओं से महरूम अस्पताल
ऑपरेशन थियेटर बनाने के साथ अल्ट्रासाउंड सहित सभी प्रकार के टेस्ट की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी हैं। मातृ-शिशु के लिए अलग से वार्ड व शिशु -नर्सरी की सुविधा भी उपलब्ध करने का प्रस्ताव है लेकिन यह सुविधाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। हर माह करीब दो हजार महिलाएं इस अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचती हैं लेकिन चिकित्सक व चिकित्सा सुविधाएं न होने की वजह से इन रोगियों को शहर के उद्यम सिंह जैन सिविल अस्पताल में इलाज करवाने के लिए भेज दिया जाता है। यह अस्पताल शहर से करीब दो किलोमीटर दूर पड़ता है ऐसे में महिला मरीजों को शारीरिक परेशानी के अलावा काफी आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में रोगी का मेन पुराना सिविल अस्पताल तक पहुुंचना भी मुश्किल हो जाता है।
सरकार की ओर से चिकित्सकों व अन्य हेल्थ स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया जारी है। जल्दी ही अस्पताल मेें चिकित्सकों व लैब आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी जाएगी।
डॉ. रणदीप सिंह पूनिया, सीएमओ