नारनौल। सराय प्राथमिक पाठशाला भवन के चार कमरों में दो स्कूल के 144 बच्चे पढ़ रहे हैं। कमरों की कमी के कारण ठंड में भी बच्चे खुले बरामदे में पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं शिक्षा प्रशासन 15 महीनों से कागजी कार्रवाई पूरी करने में व्यस्त है। इससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि शिव नगर प्राथमिक पाठशाला का भवन करीब 15 महीने पहले पीडब्लयूडी ने कंडम घोषित कर दिया था। इसके बाद प्राथमिक पाठशाला को सराय प्राथमिक पाठशाला के भवन में एक कमरा दिया गया था, ताकि जब तक नए भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाए तब तक शिव नगर प्राथमिक पाठशाला के बच्चे सराय स्थित भवन के एक कमरे में शिक्षा प्राप्त कर सकें।
करीब 15 माह बीत जाने के बाद भी शिव नगर प्राथमिक पाठशाला का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिस कारण शिव नगर प्राथमिक पाठशाला के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
सराय प्राथमिक पाठशाला में 7 कमरे हैं। इसमें से चार कमरों में सराय प्राथमिक पाठशाला और शिव नगर प्राथमिक पाठशाला के 144 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं। गौरतलब है कि तीन कमरों में सराय प्राथमिक पाठशाला की पांच कक्षाओं के 82 बच्चे और एक कमरे में शिव नगर प्राथमिक पाठशाला की पांच कक्षाओं के 62 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इंसेट
बीईओ कार्यालय के भवन का निर्माण नहीं किया गया
सराय प्राथमिक पाठशाला में 7 कमरों से 3 कमरे बीआरसी और बीईओ कार्यालय के रूप में उपयोग में लिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि बीईओ कार्यालय का स्थायी भवन पटीकरा में है। जिसे पीडब्लयूडी द्वारा कंडम घोषित किए जाने के बाद सराय प्राथमिक पाठशाला शिफ्ट किया गया था। इस कारण पाठशाला के तीन भवन बच्चों के स्थान पर कार्यालय के तौर पर उपयोग में लिए जा रहे हैं। वहीं लंबा समय बीत जाने के बाद भी पटीकरा स्थित बीईओ कार्यालय के भवन का निर्माण नहीं किया गया है।
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मिडडे मील और पढ़ाई एक ही कमरे में
कमरों की कमी के कारण शिव नगर प्राथमिक पाठशाला के 62 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ रहे हैं। वहीं कमरों की कमी के कारण मिडडे मील के तहत बच्चों को पोषण के लिए दिए जाने वाला खाना भी उसी कमरे में पकाया जाता है।
वर्जन :
शिव नगर प्राथमिक पाठशाला भवन को पीडब्लयूडी द्वारा कंडम घोषित करने के बाद शिव नगर पाठशाला को सराय पाठशाला के भवन में शिफ्ट किया गया था। शिव नगर प्राथमिक पाठशाला भवन के निर्माण के लिए एस्टीमेट बनाकर उच्च विभाग को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि बजट आने के बाद जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। ताकि बच्चों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।-सुभाष चंद , जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल।