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कोर्ट ने चामुंडा देवी धार्मिक ट्रस्ट को किया भंग

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जिले की एक कोर्ट ने अनियमितताओं के चलते चामुंडा देवी धार्मिक ट्रस्ट को भंग कर दिया है। ट्रस्ट चामुंडा देवी मंदिर का देखरेख करता था। ट्रस्ट की अनियमितताओं के संबंध में नरेंद्र सोनी उर्फ टीटू व सुरेश सैनी ने कोर्ट में केस दायर किया था। वर्तमान ट्रस्ट में प्रधान सूरज बोहरा, उप प्रधान सुभाष चौधरी, सचिव चेतन प्रकाश चौधरी, कोषाध्यक्ष विनोद गुप्ता, विनोद महता स्टोर कीपर व 11 अन्य ट्रस्टी भी थे।
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नरेंद्र सोनी उर्फ टीटू व सुरेश सैनी के अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ ने बताया कि नरेंद्र सोनी ने साल 2014 में मंदिर ट्रस्ट द्वारा दान में प्राप्त चांदी व धनराशि में घोटाला करने व मंदिर की देखरेख के साथ उचित प्रबंध न करने का आरोप लगा कर चामुंडा देवी वगैरा बनाम सूरज बौहरा वगैरा पर एक प्रतिनिधि वाद दायर किया था। इसमें सुरेश सैनी कोजिंदा भी एक वादी था। इस मुकदमे को अतिरिक्त सिविल जज वरिष्ठ खंड के प्रवेश सिंगला की कोर्ट द्वारा ट्रस्ट को भंग किया है व नरेंद्र सोनी को रिसीवर नियुक्त किया है। कोर्ट ने वर्ष 1986 में पंजीकृत हुई मंदिर की ट्रस्ट डीड के निर्देशानुसार ट्रस्ट निर्माण करने का आदेश दिया है। साथ ही प्रतिवादीगण को मंदिर की संपत्ति का गबन करने से रोका है। वादी को अन्य कोई सिविल या फौजदारी कार्यवाही करने की छूट भी दी गई है।
अधिवक्ता वशिष्ठ ने बताया कि प्राचीन मंदिर की देखरेख करने के लिए शहर के प्रतिष्ठित लोगों ने वर्ष 1986 में एक ट्रस्ट का निर्माण करके, एक ट्रस्ट डीड को सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत करवाया था। उक्त ट्रस्ट डीड के अनुसार ट्रस्टियों को ट्रस्ट का कार्यवाही रजिस्टर, रोकड़ बही खाता तथा आमदनी व व्यय का हिसाब किताब रखना आवश्यक था। ट्रस्ट का किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोल कर धनराशि उसमें जमा करवानी अनिवार्य थी। बही खातों का प्रत्येक वर्ष किसी अधिकृत व्यक्ति से ऑडिट करवाना था। ट्रस्टियों का चुनाव वर्ष 2011 में हुआ था, लेकिन उसके बाद भी वर्ष 2013 तक ट्रस्ट कोई लेखा जोखा नहीं रखा। वर्ष 2013 बाद के उनके पेश किए गए लेखा जोखा में भी वित्तीय अनियमितताएं थी व दान में प्राप्त चांदी का कोई हिसाब किताब नहीं था। ट्रस्ट का कभी कोई बैंक खाता खुलवाया ही नहीं गया। जब वर्ष 2011 में जब नए ट्रस्टियों का चयन किया गया तो उसे भी ट्रस्टी बनाया गया था। लेकिन, मंदिर में हो रही अनियमितताओं को देखते हुए आवाज उठाई। लेकिन, उनकी आवाज को दबा दिया गया। बाद में सुरेश सैनी के साथ कोर्ट में केस दायर की । उसने कहा कि जल्द ही अदालत के आदेश की पालना में रिसीवर के दायित्व को ग्रहण करेगा।
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कोर्ट ने अपने आदेश में वाद को डिक्री (मंजूर) करते हुए, वर्तमान ट्रस्ट को भंग किया है। नरेंद्र सोनी उर्फ टीटू को रिसीवर नियुक्त किया है। वर्ष 1986 में पंजीकृत हुई ट्रस्ट डीड के निर्देशों के अनुसार ट्रस्ट निर्माण करने का आदेश दिया है। मंदिर की सम्पत्ति का गबन करने से रोका है। आदेश में वादी को अन्य कोई सिविल या फौजदारी कार्यवाही करने की छूट दी गई है।
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- मनीष वशिष्ठ, वादी के अधिवक्ता
कोर्ट के आदेश की कापी मिलने के बाद ट्रस्ट अपील करेगा। अभी तक इस बारे में कुछ अधिक कहना उचित नहीं होगा। - सूरज बोहरा, भंग ट्रस्ट के प्रधान
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