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टॉपर्स अंजलि और एकता बनना चाहती हैं आईएएस, किसान की बेटी प्रिया का सपना आईआईटियन का

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बीपीएस के छात्र रिजल्ट आने पर खुशी जताते हुए। - फोटो : Narnol
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सीबीएसई के बारहवीं के रिजल्ट में जिले के विद्यार्थियों ने रिकार्ड बनाते हुए 98.8 प्रतिशत तक अंक हासिल किए। जिले के करीब 12 हजार विद्यार्थियों ने सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा दी थी। सोमवार को रिजल्ट जारी होने के बाद काफी संख्या में स्टूडेंट अपने स्कूल पहुंचे। अपने गुरुजनों से आशीर्वाद लिया। स्कूल संचालकों ने मिठाइयां बांटते हुए खुशी जाहिर की। फरवरी से शुरू हुई परीक्षाएं मार्च के अंत में खत्म होनी थी। 24 मार्च को देश में लॉकडाउन होने के बाद सीबीएसी की बची परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया था। बोर्ड ने परीक्षाओं के लिए काफी इंतजार किया।आखिर में सीबीएससी ने फैसला लिया कि बचे हुए पेपर नहीं लिए जाएंगे। इस बार करीब दो महीने देरी से रिजल्ट जारी किया गया। सोमवार को रिजल्ट जारी होने पर विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी नजर आई। सीबीएसई का रिजल्ट देखने में कुछ दिक्कत आईं। साइट न खुलने पर उनको इंतजार करना पड़ा। दोपहर बाद अधिकतर को अपने परिणाम लग गए।
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सिविल सर्विस में जाना एकता का लक्ष्य
महेंद्रगढ़। श्रीकृष्णा स्कूल की छात्रा एकता सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं। सीबीएसई बारहवीं में कला संकाय में एकता ने 97. 2 प्रतिशत अंक हासिल किए। एकता ने बताया कि वह रोजाना 5 से छह घंटे घर पर सेल्फ स्टडी करती थी। अपने इस लक्ष्य के लिए उसने किसी तरह की कोचिंग नहीं ली। मैथ में उसे कुछ डाउट रहते थे। जिस पर स्कूल प्रबंधन ने उनके लिए घर पर ही एक टीचर को अतिरिक्त क्लास के लिए नियुक्त किया था। एकता के पिता मेहरचंद जिले के बेरी गांव में सरकारी स्कूल के टीचर हैं। एकता के चार भाई बहन हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के एमडी कर्मवीर राव ने विशेष सहयोग दिया। एकता ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को सेल्फ स्टडी पर फोकस करना चाहिए। खेल के लिए कुछ समय जरूर तय करें।
नॉन मेडिकल के अंशुल का लक्ष्य एनडीए में जाना
महेंद्रगढ़। नॉन मेडिकल में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले अंशुल एनडीए में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं। इंजीनियरिंग के जरिए अंशुुल यह मुकाम पाना चाहते हैं। अमर उजाला ने बताया कि वह दसवीं कक्षा तक शहर के एक दूसरे स्कूल में थे। वहां अच्छी पढाई न होने पर उन्होंने स्कूल बदला। श्रीकृष्णा स्कूल में आने के बाद उन्हें काफी अच्छी स्टडी मिली। अशुंल ने बताया कि उनके पापा सुरेश कुमार बसई के राजकीय स्कूल में क्लर्क हैं। माता अमरेश देवी गृहिणी हैं। पढाई में कुछ देर का ब्रेक लेने पर वह अपने घर में मम्मी की मदद करते थे। उन्होंने बताया कि मैथ के यशवंत और फिजिक्स के पकंज ने विशेष सहयोग किया। अंशुल ने बताया कि वह सोशल मीडिया में केवल व्हाट्स एप का उपयोग की करते हैं। वह भी अपनी पढ़ाई संबंधी होमवर्क या नोटस आदि मंगवाने के लिए।
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किसान की बेटी प्रिया का लक्ष्य आईआईटी में जाना
महेंद्रगढ़। किसान की बेटी प्रिया आईआईटी में जाकर देश की सेवा करना चाहती है। एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ककराला की छात्रा प्रिया ने बारहवीं नान मेडिकल में 96.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
प्रिया ने कहा कि अगर हम अपना लक्ष्य तय कर लें तो हमें कोई नहीं रोक सकता । छात्रा ने कहा कि वह स्कूल के बाद रोजाना 7से 8 घंटे समय देती थी। प्रिया ने स्कूल के निदेशक जगदेव यादव का विशेष आभार जताया। प्रिया ने कहा इंग्लिश के टीचर नरेंद्र सिंह, मैथ के लिए अविनाश सर ने मोटिवेट किया। प्रिया ने बताया कि उनके पिता संजय खेती बाड़ी करते हैं। माता सरोज गृहिणी हैं। प्रिया ने कहा कि सही निर्देशन मिले तो हम अपना मुकाम हासिल कर सकते हैं।
डेढ़ महीना स्कूल नहीं जाने के बाद भी अंजलि ने 98 प्रतिशत अंक
महेंद्रगढ़।सूरज स्कूल की छात्रा अंजली ने कला संकाय में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। अंजली ने अपने जीवन बहुत दुख सहे हैं। वह सवा महीने की थी तब से अपने नाना कृष्ण कुमार के पास गांव सुरजनवास रहती है। 2002 में वह मात्र 9 महीने की थी तब उसके सिर से पिता का साया उठ गया। 12 वर्ष की उम्र में माता का साथ भी छूट गया। प्रिया को उसके मामा जयभगवान ने कभी भी माता पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। मामा किसान हैं। उनके भी दो बच्चे हैं। वह दोनों भी पढ़ाई कर रहे हैं।
होनहार छात्रा अंजलि ने कभी हार नहीं मानी। 12वीं कक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। अंजली आईएएस बना चाहती है। वह लगभग एक लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ती थी। कभी भी सोशल मीडिया का प्रयोग नहीं किया। अक्तूबर माह में उसे टायफाइड हो गया था जब लगभग डेढ़ महीने वह स्कूल नहीं जा सकी थी।
निधि का लक्ष्य डॉक्टर बनकर सेवा करना
हैप्पी स्कूल की छात्रा निधि ने मेडिकल संकाय में 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। मोहल्ला नीमड़ी नीचे निवासी निधि के पिता वेदप्रकाश दुुकानदार हैं। मां सुनीता गृहिणी हैं। निधि ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। अभी नीट की तैयारी कर रही है। उसने बताया कि वह स्कूल के अलावा लगभग 6 घंटे पढ़ाई करती थी। कभी कोई कोचिंग नहीं। जब भी डाउट होते तो वह स्कूल जाकर टीचर्स से क्लीयर कर लेती थी। उसने बताया कि कभी सोशल मीडिया का प्रयोग नहीं किया। जब भी पढ़ाई से उब जाती तो वह गाने सुन लेती थी।उसने बताया कि स्कूल अध्यापकों ने बहुत मोटिवेट किया। वह अपनी सफलता का श्रेय माता पिता, गुरुजनों तथा स्कूल मैनेजमेंट को देती हैं।
सुुरजनवास के अजय का सपना डाक्टर बनना
बीआर ज्ञानदीप सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुरजनवास के छात्र अजय कुमार ने मेडिकल संकाय में 96.6 अंक प्राप्त कर टॉप सूची में नाम दर्ज करवाया है। अजय डाक्टर बनकर देश सेवा करना चाहता है। पिता विजय सिंह सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। उनकी मां गृहणी हैैं। अजय ने बताया कि स्कूल के अलावा 8 से 10 घंटे पढ़ाई करता था। वह हमेशा एक लक्ष्य निर्धारित कर एवं नियमित पढ़ाई करता था। कोई भी डाउट होते तो वह स्कूल में अध्यापकों से पूछ लेता था। कभी कोई कोचिंग नहीं ली। जब पढ़ाई से उब जाता तो फेसबुक एवं व्हाट्स एप का प्रयोग कर लेता था। स्कूल से बहुत स्पोट मिली। किसी भी समय अध्यापक से डाउट पूछता तो मना नहीं करते थे। अभी नीट की तैयारी में जुटा हुआ हूू। सफलता को श्रेयमाता-पिता, अध्यापकों एवं स्कूल मैनेजमेंट को देता हूं।
कॉमर्स छात्रा शिखा तंवर का सपना सीए बनना
टैगोर स्कूल की छात्रा शिखा तंवर ने कॉमर्स संकाय में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार प्रदर्शन किया है। गांव चितलांग निवासी शिखा ने बताया कि वह सीए बनना चाहती है। उसके पिता सुुरेश कुमार उड़ीसा स्थित कंपनी में काम करते हैं। अजय की मां गृहिणी हैं। उसने बताया कि स्कूल के अलावा वह सात से आठ घंटे पढ़ाई करती थी। उसने कभी भी सोशल मीडिया का प्रयोग मनोरंजन के लिए नहीं किया। कभी कोई दिक्कत होती नेट पर देख लेती और स्कूलमें अध्यापकों से भी डाउट क्लीयर कर लेती थीं। उसने बताया कि जब पढ़ाई से उब जाती तो थोड़ी देर टीवी देख लेती या म्यूजिक सुन लेती। अपनी इस सफलता का श्रेय स्कूल प्राचार्या ,अध्यापक और अभिभावक को देना चाहती हूं।
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