अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नारनौल अब्दुल मजीद की अदालत ने सोमवार को महेंद्रगढ़ नगर पालिका के भवन निरीक्षक (बीआई) और चपरासी को रिश्वत के मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उसने प्रत्येक दोषियों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना जमा करने में विफल रहने पर उन्हें चार महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
जून 2017 में नांगल माला गांव के ललित कुमार की शिकायत पर राज्य सतर्कता ब्यूरो (एसवीबी), गुरुग्राम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13 और आईपीसी की धारा 120 बी के तहत कांटी गांव के भवन निरीक्षक भीम सिंह और जाटवास गांव के चपरासी बिजेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में ललित ने आरोप लगाया था कि उसने महेंद्रगढ़ के आदर्श कॉलोनी में एक भूखंड खरीदा था और बिक्री विलेख के निष्पादन के लिए नगर समिति से एनओसी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। बीआई भीम सिंह ने उनसे मिलने पर एनओसी जारी करने के एवज में उनसे दस हजार रुपये की मांग की। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, एसवीबी ने जाल बिछाया और बीआई और चपरासी को उस समय पकड़ लिया जब शिकायतकर्ता ने उन्हें दस हजार रुपये दिए। तब से, मामला अदालत के समक्ष लंबित था जिसने मामले में दोनों अधिकारियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई। भवन निरीक्षक का ड्यूटी पर बहाल होने के बाद अंबाला तबादला हो गया था। वर्तमान में वो अंबाला नगर निगम में भवन निरीक्षक पद पर कार्यरत हैं। वहीं चपरासी बिजेंद्र सिंह महेंद्रगढ़ नगरपालिका में कार्यरत है।