हकों के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी। जो लोग 50-60 सालों से हमारे हकों पर कुंडली मार के बैठे हैं, उन्हें भगाना होगा। इसके लिए सांसद या एमएलए तक ही सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि सत्ता की प्राप्ति के लिए संघर्ष करना होगा। इसके लिए ओबीसी वर्ग के लोग अभी से जुट जाएं, 2019 में हमें सत्ता को प्राप्त करना है।
ये बातें भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने कही। वे रविवार को सैनी सभा कार्यालय में ओबीसी वर्ग के लोगों को संबोधित कर रहे थे। वे एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए आए थे। सैनी ने कहा कि एक वर्ग विशेष के लोग, जिनका जनाधार पूरे प्रदेश में केवल 10 प्रतिशत है ने 60 सालों से प्रदेश में राज किया है। जबकि 50 प्रतिशत ओबीसी के लोग राज नहीं कर पाए हैं। वहीं ओबीसी के साथ-साथ 15 प्रतिशत एससी वर्ग तथा इतने ही सामान्य वर्ग के लोगों को नुकसान हुआ है। 60 सालों में प्रदेश में 10 प्रतिशत तक सिमटने वाले इस वर्ग के लोगों का हर कहीं बोलबाला है। नौकरियों से लेकर राजनैतिक में यह ही वर्ग आगे हैं। वहीं अब वे आरक्षण की मांग भी करने लगे हैं, जो बिल्कुल भी न्यायोचित नहीं है।
सांसद राजकुमार ने कहा कि इन 60 सालों में ओबीसी के हकों की आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। अब मैंने यह आवाज उठाई है, मगर मेरी आवाज को भी दबाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह दबेगी नहीं। उन्होंने कहा कि संघर्ष का बिगुल अब बज चुका है तथा इसको कायम रखने के लिए सबको 2019 डारगेट बनाना होगा। यदि इस बार चूक गए तो परिणाम बहुत ही भयंकर हो जाएंगे। इसलिए ओबीसी वर्ग के लोगों को अभी से सभी पार्टियों को भूलाकर अपने वर्ग के हित में एक हो जाना चाहिए।
भाजपा-कांग्रेस-इनेलो सभी पर साधा निशाना
सांसद राजकुमार ने कहा कि अब तक प्रदेश में कोई भी पार्टी सत्ता में आई हो, चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस या फिर इनेलो सबके सीएम एक ही वर्ग के बने। इस वर्ग के किसी भी सीएम ने ओबीसी के लिए कोई काम नहीं किया।
राज्य सभा में सब फेलियर, फिर क्या काम
सांसद सैनी ने राज्य सभा के सांसदों पर भी हमला करते हुए कहा कि राज्य सभा में जो भी सांसद हैं, वे सब एग्जाम में फेल होने वाले हैं। चुनाव हारने के बाद पार्टियां इनको राज्य सभा पहुंचा देती है। वहीं वहां पर जाकर यह सदन की कार्रवाई को भी ठीक से नहीं चलने देते। जिसके कारण संसद का ठीक से काम नहीं हो पाता तथा महत्वपूर्ण बिल भी रुक जाते हैं। ऐसे में इनका कोई काम नहीं होना चाहिए और इसको समाप्त कर देना चाहिए। इस मौके पर सैनी सभा के प्रधान जयप्रकाश सैनी, रामसिंह सैनी, सभा के सचिव सतीश सैनी, गगन सैनी, भगत सिंह सैनी व सुरेंद्र नारनौलिया आदि थे।