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निजीकरण के विरोध में बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे

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मांगों को लेकर हड़ताल के चलते बंद बैंक। संवाद - फोटो : Narnol
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यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के विरोध में वीरवार को जिले के सभी सरकारी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण जिले में लगभग 10 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित रहा। इससे बैंक उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को भी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।
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बता दें कि केंद्र सरकार संसद के मौजूदा सत्र में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लेकर आ रही है, जिससे भविष्य में किसी भी सरकारी बैंक को निजी क्षेत्र में देने का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार देश में केवल पांच बैंकों को सरकारी बैंकों के रूप में रखेगी। शेष बैंकों को निजीकरण करेगी। वर्तमान में केंद्र सरकार यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, तथा बैंक ऑफ महाराष्ट्र को निजीकरण किया जा रहा है। ऐसे में बैंक कर्मचारी व अधिकारी सरकार के इस निर्णय के खिलाफ लामबंद होकर दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का फैसला लिया।
दस करोड़ रुपये का लेन देने हुआ प्रभावित:
एलडीएम संजय कुमार ने बताया कि जिले में लगभग 121 बैंक शाखाएं हैं। इन शाखाओं में चपरासी से लेकर अधिकारी तक लगभग 1100 कर्मचारी काम कर रहे हैं। वीरवार की हड़ताल के दिन लगभग दस करोड़ रुपये का लेन देन प्रभावित हुआ है। हड़ताल में एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के कर्मचारी शामिल हुए हैं।
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उपभोक्ता रहे परेशान
बैंकों की हड़ताल की वजह से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। आवश्यक कार्य से अपने खातों से रुपये निकालने की मंशा भी पूरी नहीं हो पा रही है। कई लोगों को पहले ही जानकारी हो चुकी थी लेकिन दिक्कत ग्रामीण इलाकों में अधिक है। जानकारी न होने के कारण उपभोक्ता बैंकों की शाखाओं पहुंचे। वहां जाने के बाद बैंक बंद होने की बात पता चलने पर मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
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