नारनौल। शराब ठेके पर अवैध पिस्टल के बल पर डकैती, तोड़फोड़, रंगदारी मांगने व हवाई फायर कर दहशत फैलाने के एक मामले में एडीजे ने आरोपी ऋषिदेव की जमानत याचिका नामंजूर की है। आरोपी की पूर्व में भी दो बार जमानत याचिका खारिज की जा चुकी हैं। आरोपी के एक साथी को पूर्व में जमानत मिल चुकी है।
नांगल चौधरी थाना क्षेत्र में 20 दिसंबर 2024 को शाम सवा 4 बजे गांव भेडंती स्थित शराब ठेके के सेल्समैन सुभाष ने ठेके मालिक को फोन कर बताया कि तीन लोग जबरन ठेके के अंदर घुसे, जिनमें से एक पास पिस्टल थी।
ठेके में घुसते ही उन्होंने शराब की बोतलों को तोड़ना शुरू कर दिया, जबरन 20 हजार नकद ले लिए और अपने साथ तीन बोतल शराब ले गए।
उन्होंने हवाई फायर करते हुए मासिक 25 हजार रुपये की रंगदारी देने की बात कही और न देने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी। सुभाष ने बताया कि उन्होंने ठेके में करीब एक लाख रुपये का नुकसान भी किया है।
फरवरी 2025 को दर्ज हुआ मामला
ठेके के मालिक ने इस संबंध में थाने में शिकायत दी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 1 फरवरी 2025 को आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने ग्राम मुलोदी, तहसील नांगल चौधरी निवासी ऋषिदेव व उसके साथी अजीत व रोहताश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रिमांड के दौरान सामने आया कि अजीत ने हवाई फायर किया था।
21 जनवरी को लगाई याचिका
आरोपी ऋषिदेव ने सबसे पहले 29 जुलाई 2025 को व इसके बाद 18 सितंबर 2025 को दो बार जमानत याचिका दायर की थी और दोनों ही बार कोर्ट ने इसकी याचिका खारिज की थी। इसके बाद आरोपी ने इस साल 21 जनवरी को अपने वकील के माध्यम से जमानत याचिका एडीजे की कोर्ट में दायर की थी।
ये दी गईं दलीलें : आरोपी के वकील ने कहा कि ऋषिदेव 9 जनवरी 2025 से जेल में है। एफआईआर में उसका नाम नहीं था। जांच पूरी हो चुकी है और चालान पेश किया जा चुका है। आरोपी के साथी रोहताश को उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर जमानत दी जाए।
वहीं पीपी ने कहा कि जांच के दौरान अभियुक्त की सक्रिय संलिप्तता पाई गई है। आरोपी के खिलाफ इसी तरह के दो अन्य मामले लंबित हैं। यदि जमानत दी गई, तो वह कानून की प्रक्रिया से भाग सकता है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गंभीर आरोप हैं कि उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर शराब के ठेके में तोड़फोड़ की, 1 लाख रुपये का नुकसान किया, नकदी लूटी और मासिक रंगदारी 25,000 रुपये न देने पर जान से मारने की धमकी दी। अपराध की प्रकृति और साक्ष्यों को देखते हुए एडीजे नितिन राज ने जमानत न देने का फैसला सुनाया।