मंडी अटेली। कस्बे में करीब 16 साल पहले निर्मित बाल भवन कई सालों से खंडहर बना है। नतीजतन अटेली में बच्चों के विकास के लिए होने वाली विभिन्न प्रकार की गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है।
इस कारण अटेली क्षेत्र के 43 गांवों के बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच नहीं मिल पा रहा, जो क्षेत्र के पिछड़ने का प्रमुख कारण बना है। गौरतलब है कि 14 नवंबर 1994 को हरियाणा के तत्कालीन विकास एवं पंचायत मंत्री राव बंशी सिंह ने अटेली में पीएम श्री स्कूल के साथ नगर पालिका की जमीन पर बाल भवन की नींव रखी थी। इसके बाद पूरे 12 साल में बाल भवन की बिल्डिंग बन कर तैयार हुई थी।
11 नवंबर 2006 को जिला बाल कल्याण अधिकारी चंद्र मोहन भटनागर की अध्यक्षता में बाल भवन का उद्घाटन किया गया था। उस समय क्षेत्र के लोग इस बाल भवन को यहां एक नई उपलब्धि के रूप में देख रहे थे। लोगों की सोच व भावनाओं के अनुसार ही इस बाल भवन में बच्चों को उनकी उम्र, योग्यता और क्षमता के अनुसार प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने के अवसर मिलने लगे।
इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्षेत्र के बच्चों को खेल, पारंपरिक नृत्य, पारंपरिक संगीत, शास्त्रीय संगीत, कत्थक, कंप्यूटर, पेंटिंग व दूसरी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से आगे बढ़ने के अवसर मिलने लगे। इसके चलते क्षेत्र के बच्चे चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर थे, लेकिन बाल भवन की बिल्डिंग को पीडब्ल्यूडी विभाग ने महज 15 साल बाद 2021 को कंडम घोषित कर दिया। इसके चलते प्रशासन ने चार साल पहले सुरक्षा के लिहाज से यहां चल रहे तमाम गतिविधियों पर रोक लगा दी। तभी से क्षेत्र में बाल भवन में चल रही तमाम गतिविधियां बंद हैं। इस कारण क्षेत्र के बच्चे योग्यता होने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पा रहे।
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वर्जन :
बाल भवन अटेली का भवन कंडम हो चुका है। इस कारण यहां किसी भी प्रकार की कोई गतिविधि नहीं चल रही हैं। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत करवाया दिया गया है। विभाग को नई बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव दिया हुआ है।-राजेंद्र सिंह, जिला बाल कल्याण अधिकारी, नारनौल।
वर्जन :
बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का उचित अवसर नहीं मिल पा रहा है। बाल भवन के नवनिर्माण के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा। नए भवन के लिए सरकार से जल्द बजट मंजूर करवाएंगे। बजट मंजूर होने के बाद जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर भवन का निर्माण कार्य करवाया जाएगा।-आरती सिंह राव, स्वास्थ्य मंत्री