फोटो नंबर- 05नारनौल स्थित जिला पशु अस्पताल।
नारनौल। क्षेत्र में आसमान से आग बरस रही है। तेज धूप सुबह 7 बजे निकलती है और शाम 6 बजे तक रहती है। तेज धूप के कारण गाय-भैंस आदि का ठीक ढंग से देखभाल नहीं होने के कारण हीट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है, जो जानलेवा भी हो सकता है।
वहीं अधिक गर्मी से दूध उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होती है। इस कारण पशु पालकों को आर्थिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि गर्मियों के दिनों में गाय-भैंस के बीमार होने की संभावना दोगुना हो जाती है और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी अधिक बना रहता है।
पशुपालन विभाग द्वारा विभिन्न गांवों में और पशु अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अधिक गर्मी और तेज धूप से पशुओं के बचाव और खानपान के बारे में पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। पशुपालक गर्मियों के दिनों में पशुओं को सुबह 10 बजे तक पेड की छांव या अन्य छायादार जगह पर बांधे।
तेज धूप के समय पशुओं को शेल्टर में बांधे और शेल्टर में कूलर और पंखे लगाकर व ठंडी पल्लियों को लटका कर पशु बांधने के स्थान को ठंडा बना सकते हैं। पशुओं को सुबह और शाम दोनों समय नहलाना चाहिए और नियमित अंतराल पर पानी पिलाना चाहिए। वहीं दुधारू पशुओं को दी जाने वाली चाट में गर्म तासीर के खाद्य पदार्थों का मिश्रण देना चाहिए।
हरा चारा व हरी सब्जियां ज्यादा खिलानी चाहिए ताकि पशुओं को गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकें और दूध उत्पादन को कम होने से रोक जा सकें।
वर्जन :
पशुपालकों से अपील है कि गर्मी और तेज धूप से बचाव के लिए पशुओं को ठंड वातावारण प्रदान करें। चाट में ठंडी तासीर के खाद्य पदार्थों का मिश्रण अधिक रखें। विभाग द्वारा पशुपालकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
डॉ. पवन यादव, पशु चिकित्सक, जिला पशु अस्पताल, नारनौल।