फोटो संख्या:67 रेवासा की लुवास शाखा में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद किसान। स्रोत: संस्थान
महेंद्रगढ़। आज फसल आधारित खेती पर्याप्त नहीं है। किसान पशुपालन, डेयरी और स्थानीय स्तर पर दुग्ध प्रसंस्करण को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। यह राय रिवासा स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में डॉ. योगेंद्र सिंह यादव ने दी। हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र में किसान दिवस पर एक विशेष जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम में उन्होंने संचालन एवं समन्वय किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक किसानों और पशुपालकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों की पशुपालन पद्धतियों में सुधार, डेयरी व दुग्ध प्रसंस्करण को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान वैज्ञानिकों ने कार्यक्रम में किसानों को स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, संतुलित आहार प्रबंधन, नस्ल सुधार, स्वास्थ्य देखभाल व दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन दूध से दही, घी, पनीर आदि जैसे व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर दूध प्रसंस्करण अपनाने से बिचौलियों पर निर्भरता घटती है और बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
नए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण बिल 2025 के प्रावधानों पर भी संवाद हुआ। वक्ताओं ने कहा कि यह बिल मनरेगा का व्यापक और दीर्घकालिक सुधारात्मक रूप है। इसके अंतर्गत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इससे पशुपालन, चारा उत्पादन, ग्रामीण अधोसंरचना और आजीविका आधारित गतिविधियों को भी नई मजबूती मिलेगी।