जिले में एंबुलेंस सेवा का बुरा हाल है। मरीजों को लेकर दौड़ने वाली एंबुलेंस खुद ही मरीज बनी हुई है। अधिकांश एंबुलेंस खटारा हो चुकी हैं, वहीं टायर पूरे गंजे हो गए हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा रामभरोसे ही है। मंगलवार को हुआ हादसा भी एंबुलेंस के टायर खराब होना ही माना जा रहा है। इस हादसे में अब मरने वालों की संख्या भी तीन हो गई है। जिसमें दो प्रसूता व एक मासूम शामिल हैं। पूरे जिले में इस समय केवल 12 एंबुलेंस ही ऑन रोड हैं।
जिले में एंबुलेंस सेवा का हाल बेहाल है। एंबुलेंस की गाड़ियां खटारा होती जा रही हैं। इस समय जिला में 20 एंबुलेंस की मांग है, जबकि कागजों में 14 तथा ऑन रोड 12 एंबुलेंस ही पूरे जिले में चल रही हैं। जो एंबुलेंस चल रही हैं, उनमें टायरों, इंजन व अन्य कई कमियां हैं। जिसके कारण लंबी दूरी पर जाने पर इनसे हादसा होने का डर बना हुआ है। मंगलवार को हुए हादसे का कारण भी खराब टायर व खटारा एंबुलेंस ही मानी जा रही है।
जिले में 20 एंबुलेंसों की मांग
मांग के हिसाब से जिला में 20 से अधिक एंबुलेंसों की आवश्यकता है, मगर यहां पर निर्धारित की गई 14 एंबुलेंस भी नहीं मिल रही हैं। जिसके कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है। अधिकांश एंबुलेंसों में टायर की समस्या सबसे अधिक है। इसका मुख्य कारण है कि एंबुलेंस ढाई लाख किलोमीटर से भी ज्यादा चल चुकी हैं, मगर उनके टायर चेंज नहीं हुआ है। 14 में से एक पहले से एक्सीडेंट हुई खड़ी है, वहीं एक कंडम होने के लिए खड़ी कर दी गई है। इस प्रकार जिला में 12 एंबुलेंस ही दौड़ रही हैं।
यह है पूरी स्थिति
-खराब रोड के कारण भी कंडम हो रही हैं एंबुलेंस
जिला के खराब सड़कों के कारण भी एंबुलेंस खराब हो रही हैं। एक एंबुलेंस चालक ने बताया कि खराब सड़कों के कारण एंबुलेंस में टायर खराब होने, पट्टी टूटने तथा कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यही नहीं रोड खराब होने के कारण वे समय पर भी मरीज के पास नहीं पहुंच पाते।
रोडवेज विभाग की टीम ने किया दौरा
हादसे के बाद रोडवेज विभाग की टीम ने बुधवार को नागरिक अस्पताल का दौरा किया। दौरे के बाद टीम ने पहले से ही कंडम खड़ी पांच एंबुलेंस को कंडम घोषित किया। वहीं अन्य एंबुलेंस की भी जांच की।
कंडम में लगे 16 दुरुस्त टायर
नागरिक अस्पताल में जो कंडम एंबुलेंस खड़ी हैं, उनमें 16 अच्छे टायर लगे हैं। अब ये गाड़ियां कंडम घोषित हो चुकी हैं। इसलिए इनके टायर भी चेंज नहीं किए जा सकते। वहीं जो सही एंबुलेंस हैं, उनके टायर गंजे हैं।
ड्राइवरों पर भी उठते रहे सवाल
इस समय एंबुलेंस सेवा में 30 ड्राइवर हैं। एक साल पहले ड्राइवरों की योग्यता पर भी सवाल उठे थे। ये सभी ड्राइवर एनएचआरएम के तहत लगे हुए हैं।
एंबुलेंस हादसे में दो और मरे
नारनौल। गांव नीरपुर के पास एंबुलेंस व रोडवेज बस की हुई टक्कर में एक प्रसूता की हुई मौत के बाद बुधवार को उपचार के दौरान एक अन्य प्रसूता व उसके बच्चे की भी मौत हो गई। इस प्रकार हादसे में मरने वालों की संख्या तीन हो गई। मृतका व उसके बच्चे का पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम कराया गया। जिसके बाद ककराला गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ज्ञात हो कि मंगलवार दोपहर को नीरपुर के पास एक एंबुलेंस चालक ने रोडवेज बस को पीछे से टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक प्रसूता की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य प्रसूता व उसके बच्चे समेत आठ लोग घायल हो गए थे। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया गया था। जहां पर उपचार के दौरान गांव ककराला निवासी 25 वर्षीय बाला पत्नी मनोज व उसके करीब 20 दिन के बच्चे की मौत हो गई।
हादसे की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की कमेटी का गठन किया गया है, जो अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी। वहीं कंडम एंबुलेंस मेरे आने से पूर्व की हैं। मैंने अभी तीन माह पहले ही ज्वाइन किया है। जिस भी एंबुलेंस में जो खराबी होगी, उसको ठीक करा दिया जाएगा। -डॉ. जितेंद्र यादव, इंचार्ज एंबुलेंस सेवा, जिला महेंद्रगढ़