कहीं आप बच्चों के साथ हुड्डा पार्क तो नहीं जा रहे हैं। अगर हुड्डा पार्क जा रहे हैं तो संभल कर जाएगा क्योंकि पार्क में करंट दौड़ रहा है। नगर के हुड्डा पार्क में जगह जगह वायरों के नंगे ज्वाइंट हैं जिससे पार्क में करंट का खतरा बढ़ गया है। दूसरा ये ज्वाइंट लोहे के पोल के साथ हैं। अगर नंगे ज्वाइंट पोल के टच हो गया तो उसमें भी करंट आ सकता है।
इसलिए आप और अपने बच्चों को पार्क में संभल कर लेकर जाएगा। अगर करंट लग गया तो कोई अनहोनी हो सकती है। इतना ही नहीं पार्क में समस्याओं की कमी नहीं हैं। शहर के हुड्डा पार्क समस्याओं का अंबार लगा हुआ हैं। पार्क में झूले टूटे हुए हैं तथा हाइमास्क लाइट भी खराब पड़ी हैं। इसके अलावा पार्क को मेनटेन भी नहीं रखा जा रहा है।
हर रोज सुबह-शाम हजारों आदमी, बच्चे, औरतें घूमने के लिए अपने बच्चों के साथ आते हैं लेकिन वहां पर झूले टूटे होने के कारण बच्चे तो वापस निराश होकर लौट जाते हैं। धीरे-धीरे पार्क में अब तो भीड़ भी कम होने लगी है। नगरपालिका प्रशासन को पता होने के बाद भी इस और ध्यान नहीं दे रहा।
ढाई करोड़ की लागत से बनाया था पार्क:
रणबीर सिंह हुड्डा पार्क लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से 2012 में बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेद्र सिंह हुड्डा ने 20 मई 2012 को इसका उद्घाटन किया गया था। तत्कालीन विधायक राव दान सिंह ने मुख्यमंत्री हुड्डा से सिफारिश कर यह पार्क बनवाया था ताकि लोग सुबह-शाम आकर यहां अपना समय व्यतीत कर सकें। लेकिन देखरेख के अभाव में मात्र 4 साल में ही पार्क की हालत खस्ता हो चली है। जगह-जगह टाइलें टूटी हुई, तीन चार पौधे खराब हो चुके हैं तथा लाइटों की समस्या भी पार्क में बनी हुई है। इसके अलावा फव्वारे भी पिछले कई दिनों से काम नहीं कर रहे। प्रशासन इस मामले में जरा भी गौर नहीं फरमा रही। जबकि इन समस्याओं से लोगों का आए दिन रुबरु होना पड़ता है। इसके अलावा पार्क की सुंदरता के भी ग्रहण लग रहा है
झूलों की हालत हुई खस्ता
इस समय बच्चों की पढ़ाई का दौर चल रहा है। बच्चों को सात दिन में मात्र एक संडे ही मौज मस्ती करने का मिलता है। जब वह अपने परिजनों के साथ पार्क मौज मस्ती करने आते हैं तो टूटे हुए झूलों के कारण संडे का मजा किरकिरा हो जाता है। पार्क के अधिकतर झूले टूटे हुए हैं। इन झूलों न तो वहां से हटाए जा रहे न ही उनको बदले जा रहे। इन पर झूलते समय कई बार बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं।
लाइट बनी पार्क की बड़ी समस्या
लाइट की समस्या प्रशासन के लिए कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन इसका नुकसान बहुत बड़ा है। अगर किसी दिन नंगी तारों के चिपके कोई हादसा हो गया तो प्रशासन को लेने के देने पड़ जाएंगे। पार्क में वायरों के जगह-जगह ज्वांइट लगे हुए हैं। कुछ ज्वांइटों पर टेप भी मारी गई तो कुछ खुले पड़े हैं। तार के टुकड़ों को जोड़ कर ही पार्क में काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा रात्रि के समय पार्क में अंधेरा कायम हो जाता है क्योंकि एक लंबे समय से पार्क में लगी हाई मास्क लाइटें खराब पड़ी हैैं। इन लाइटों को उतारा तो गया है लेकिन उनकी मरम्मत अभी तक नहीं करवाई है। रात्रि होते ही पार्क में अंधेरा हो जाता है। अभी केवल खंभों पर लगी फैंसी लाइटों से ही थोड़ा बहुत काम चल रहा है। पार्क की सुंदरता बढ़ाने वाले फव्वारे भी पिछले पांच महीनों से खराब पड़े हैं। इसके अलावा एक छोटे फव्वारे की मोटर खराब पड़ी है।
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इस संबंध में डा. अजीत कुमार साहु ने बताया कि नगरपालिका को पार्क को व्यवस्थित रखना चाहिए। इसके लिए चाहे 5 रुपये इंट्री फीस लगा लेें लेकिन पार्क में जनता के लिए कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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इस संबंध में गौरव शर्मा ने बताया कि पार्क अनेकों समस्याएं हैं। बच्चों के झूले टूटे हुए हैं। कई बार बच्चे इनके कारण चोटिल भी हो जाती हैं। प्रशासन या तो झूलों को बदले या फिर टूटे हुए झूलों की मरमत करवाए।
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इस संबंध में मनोज कुमार ने बताया कि बच्चों के लिए यहां कुछ नहीं है। बच्चे संडे को लेकर मौज मस्ती करने आते हैैं लेकिन बच्चों के झूले टूटे होने के कारण वो वापस निराश ही लौट जाते हैं।
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वर्जन:
इस संबंध में नगरपालिका चेयरपर्सन रीना बंटी ने बताया कि पार्क संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए पालिका ने विगत बैठक में प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है अभी उसका बजट नहीं आया। बजट आते ही पार्क में काम शुरू करवा दिया जाएगा।