फोटो संख्या:76- दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मंचासीन कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, विशे
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) में भारत में बुजुर्गों के कल्याण पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग व विधि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ एवं शोधार्थी शामिल हो रहे हैं। भारत में बुजुर्गों का कल्याण, भारत की दृष्टि एट 2047 में योगदान विषय पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सामाजिक रक्षा संस्थान, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने ने बुजुर्गों की देखभाल की आवश्यकता और भारत की दृष्टि एट 2047 में उनके योगदान पर जोर दिया तथा अन्य देशों में बुजुर्गों के कल्याण की तुलना की।
सम्मेलन की शुरुआत में विश्वविद्यालय की मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान पीठ की अधिष्ठाता प्रो. पायल चंदेल ने समाज में बुजुर्गों के कल्याण के महत्व को रेखांकित किया। आयोजन के सह-संयोजक प्रो. राजीव कुमार सिंह ने कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान में मनोवैज्ञानिक सहायता आपदा प्रबंधन विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाषिस भद्र ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि बुढ़ापा केवल उम्र बढ़ने का परिणाम नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी संबंधित है। प्रो. सुभाषिस भद्र ने लखनऊ उत्तर प्रदेश (2013) में बुजुर्गों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाओं के महत्व पर किए गए शोध का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भजन, कीर्तन जैसी प्रथाएं 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के कल्याण में सहायक होती हैं। प्रो. अजय कुमार ने माइंडफुल एजिंग का विज्ञान विषय पर व्याख्यान दिया।