सीएए के समर्थन में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को उनके हस्ताक्षर से लागू हुए नागरिकता संसोधन कानून के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व भारत तिब्बत सहयोग मंच के जिला संयोजक मनीष वशिष्ठ ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून 2019 लागू होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के धार्मिक आधार पर प्रताड़ित हिंदू, सिख, जैन, ईसाई, पारसी व बौद्ध धर्मों के लोग भारत के नागरिक बन कर सम्मान के साथ जीने का हक प्राप्त कर सकेंगे। यह कानून मानवता व मानवीयता के दृष्टिकोण से भारत सरकार का बड़ा अहम कदम है। ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के बाद उक्त धर्मों के लोग जो पाकिस्तान व बांग्लादेश में रह रहे थे, उनकी जनसंख्या में भारी गिरावट आई हैं। कुछ अपने जीवन व धर्म को बचाने के लिए भारत में आ गए। लेकिन, वे बिना नागरिकता के इस देश में अमानवीय जीवन जीने को मजबूर थे। अब इस कानून के लागू होने से उन्हें देश में सम्मान से जीने का हक प्राप्त होगा। वशिष्ठ ने बताया कि सीएए इस देश की संसद के दोनों सदनों में बहस के बाद बहुमत से पारित हुआ है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से कानून का रूप ले चुका है। लेकिन, कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए संविधान के अनुरूप पारित इस कानून का विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोग कभी भी संविधान के हितैषी नहीं हो सकते हैं। अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति भारत सरकार को दंगाइयों को सख्ती से नियंत्रित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया। जिला बार एसोसिएशन के सचिव पवन यादव एडवोकेट, रतन लाल सैनी, हनुमान सिंह, प्रदीप शांडिल्य, कृष्ण कुमार शर्मा, गोबिंद शर्मा, पवन कौशिक, कुलदीप भारद्वाज, आशीष शर्मा, राजेश सैनी, नरेंद्र यादव, बिजेंद्र प्रताप सिंह, कर्ण सिंह सैनी, प्रवीण शर्मा, श्याम शुक्ला, प्रेम कुमार भारद्वाज, सुशील, सीताराम व हेमंत शर्मा सहित अन्य अधिवक्तागण उपस्थित थे।