नारनौल। स्कूल से विभिन्न कारणों के चलते दूर हो चुके बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग ने समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है। शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के गांवों और मोहल्लों में जाकर अभिभावकों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है।
अभिभावकों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग द्वारा जिले में ड्रॉपआउट बच्चों की सटीक पहचान के लिए चार स्तरों पर विशेष सर्वे कराया जाएगा। इससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इस अभियान में केवल शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक ही नहीं, बल्कि पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, विद्यालय प्रबंधन समितियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और शिक्षा स्वयंसेवक भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।
शिक्षा विभाग के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सत्र 2024-25 में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को चिन्हित कर नए सत्र 2026-27 में दोबारा विद्यालयों में नामांकन कराना है। इसके लिए स्कूल स्तर, पंचायत स्तर, ब्लॉक स्तर और जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी बल्कि बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित होगा। यह पहल शिक्षा के अधिकार को धरातल पर साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वर्जन-
ड्रापआउट बच्चों के सर्वे के लिए योजना तैयार कर कार्य शुरू कर दिया गया है। शिक्षकों की टीम अपने-अपने क्षेत्र में इस कार्य के लिए जुट गई है। इसके लिए अन्य संस्थाओं को भी प्रेरित किया जा रहा है। -अशोक शर्मा, जिला परियोजना संयोजक, नारनौल