अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिले में सभी क्रशर व हॉट मिक्स प्लांट वीरवार से बंद हो गए हैं। जिले में करीब 115 क्रशरों पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने टीमों का गठन कर दिया है। जिले में एक से 10 नवंबर तक क्रशर पूरी तरह से बंद रहेंगे। इससे जिले के लोगों को भी प्रदूषण से राहत मिलेगी क्योंकि सैकड़ों ट्रक रोड़ी लेकर दिल्ली-एनसीआर शहर से होकर जाते हैं। ऐसे में नारनौल शहर के लोगों को भी प्रदूषण की समस्या से जूझना पड़ता है। वहीं, सड़क पर ट्रकों के दबाव के कारण हादसे होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में 10 दिन तक नारनौल शहर के लोगों को ट्रक-डंपर से होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी।
एडीसी महावीर प्रसाद ने जिले के विभिन्न क्रशर जोन का वीरवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यूनिटों को बंद पाया। उनके साथ हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता रविंद्र यादव भी मौजूद थे। एडीसी ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे लगातार टीमें बनाकर क्रशर जोन में निरीक्षण करते रहें। किसी भी सूरत में पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड के निर्देशों की अवहेलना नहीं होनी चाहिए। अगर कोई नियमों की अवहेलना करता पाया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एडीसी ने धौलहेडा, बीगोपुर व बखरीजा क्रशर जोन का निरीक्षण किया। एडीसी ने कहा कि खनन कार्य 10 नवंबर तक पूरी तरह से प्रतिबंधित है। क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप सिंह ने बताया कि जिले में करीब 115 क्रशर हैं। सभी क्रशरों को बंद करवा दिया है। इन पर नजर रखने के लिए टीमें 24 घंटे निगरानी रखेंगी।
बता दें कि ट्रक रोड़ी लेकर नारनौल से रेवाड़ी होते हुए दिल्ली जाते हैं। ऐसे में दस दिन तक लोगों को ट्रकों के धुएं से होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी।
यहां होता है खनन
जिले में खनन का कार्य नांगल चौधरी,निजामपुर एरिया में अधिक होता है। इसमें खतौली गांव, धुलेड़ा, कारोता, बायल, रघुनाथपुरा, मडराना, जकोरियावास, महेंद्रगढ़ में दादरी रोड पर अरावली में क्रशर लगे हुए हैं। खनन कार्य से डस्ट के कारण वायु प्रदूषण फैलता है। ऐसे में दीपावाली को देखते हुए क्रशर, हॉट मिक्स प्लांट, ईट भट्ठे के कार्य पर रोक लगा दिया गया है। क्रशर जोन बंद होने पर मजदूरों को छुट्टी कर दी गई है।
ये है मामला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण के स्पष्ट निर्देश हैं कि एक से 10 नवंबर तक जिले में कोई भी क्रशर नहीं चलेगा। इसके अलावा ईंट भट्ठे व बड़े स्तर के निर्माण कार्यों पर भी रोक लगाई गई है। ऐसा दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण प्रदूषण के बिगड़े हालत पर नियंत्रण रखने के लिए कदम उठाया है।