ब्राह्मणों ने मनाया श्रावणी उपाकर्म पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। श्रावणी उपाकर्म शुक्रवार को छोटा तालाब के जलाशय पर मंत्रोच्चारण और श्रद्धा भावना से मनाया गया। श्रावणी उपाकर्म शारदा संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य देवदत्त शास्त्री के सानिध्य में यह आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
सभी ब्रह्मजनों ने स्नान कर सर्वप्रथम जल में खड़े होकर जलक्रिया की। उसके बाद मंदिर में हवन कर सप्त ऋषियों का पूजन किया। सप्त ऋषियों को यज्ञोपवीत चढ़ाकर सभी ने नये यज्ञोपवीत धारण किए। आचार्य देवदत्त शास्त्री ने शारदा संस्कृत महाविद्यालय के 11 ब्रह्मचारियों का यज्ञोपवीत संस्कार करवाया। उन्होंने यज्ञोपवीत के लाभ और उसकी महिमा का वर्णन किया। आचार्य देवदत्त शास्त्री ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म हर वर्ष रक्षाबंधन के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण है। ग्रहण में यह उपाकर्म वर्जित होने के कारण आज किया गया है। आचार्य ने बताया कि शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि यदि रक्षाबंधन को ग्रहण हो तो पंचमी के दिन इस उपाकर्म को नाग पंचमी और संस्कृत दिवस के दिन किया जाए। देवदत्त शास्त्री ने बताया ने बताया कि संस्कृत वैज्ञानिक दृष्टि से विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है। कार्यक्रम के अंत में भंडारा हुआ। हवन, पूजन आदि पं. देवदत्त शास्त्री, पं. मनोज शास्त्री, पं. रविंद्र शास्त्री, पं. सीताराम शर्मा, पं. रामनिवास शर्मा, संतोष शर्मा आदि ने पूर्ण करवाया।