सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शनिवार को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं की जांच से लेकर उनको बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए पंजीकरण किया गया। जिसमें 80 महिलाओं ने जांच कराई।
चिकित्सीय टीम ने महिलाओं की शारीरिक जांच पश्चात शुगर, बीपी, हाईपर टेंशन सहित अन्य जांच की। जिसकी रिपोर्ट के अनुसार 12 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में मिली, जो कि सतत रूप से चिकित्सकीय टीम की नजर में रहेगी। 45 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा गया। चिकित्सकों ने कहा कि गांवों चिकित्सीय संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं है। संतुलित भोजन नहीं लेने के कारण उनमें एनीमिया, बीपी, शुगर जैसी समस्याएं बनी हुई है। एनीमिया पीड़ित महिलाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हाई रिस्क में मिलीं 12 गर्भवतियों को घर पर ही सभी सुविधाएं दी जाएगी। शिविर में सुपरवाइजर मुन्नी बाई, पुष्पावती, वरुण कुमार लैब टेक्नीशियन ने मरीजों के जांच में सहयोग किया।
शिविर की इंचार्ज डॉ. तनेजा यादव ने बताया कि एक गर्भवती महिला में 12 ग्राम रक्त की अत्यंत जरूरत है, क्योंकि गर्भ में बच्चे का विकास रक्त से ही संभव होता है। इस दौरान गर्भवती महिला को अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि पंजीकृत महिलाओं पर डिलीवरी होने तक एएनएम व आशा वर्कर नजर रखेंगी।
पौष्टिक व संतुलित भोजन खाने के लिए प्रेरित किया
डिप्टी सीएमओ डॉ. विजय यादव ने बताया कि महिलाओं में एनीमिया की समस्या अधिक है। विभागीय निर्देशानुसार शिविर में गर्भवती सभी महिलाओं को गुड़-चना बांटा गया गया है। साथ ही उन्हें पौष्टिक व संतुलित भोजन खाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने महिलाओं को योगासनों के लिए भी प्रेरित किया, जिससे शारीरिक स्फूर्ति के साथ आत्मविश्वास मजबूत बनेगा। पीडितों को एंबुलेंस, दवाई व चिकित्सीय सुविधा पूरी तरह से मुफ्त मिलेगी।