फोटो नंबर-07गांव बिहाली में बना माता का मंदिर। संवाद
मंडी अटेली। अटेली से बहरोड मार्ग पर करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव बिहाली को तकरीबन 700 वर्ष पहले बिहारी सिंह गादोदिया ने बसाया था। इसीलिए गांव का नाम बिहाली पड़ा।
लगभग 5 हजार की आबादी वाले इस गांव में 3268 मतदाता मत का प्रयोग करके प्रतिनिधि चुनते हैं। गादोदिया गोत्र बाहुल्य गांव में लोगों की धर्म में आस्था भी बहुत है। इसके चलते भगवान नृसिंह जी, ठाकुर जी, हनुमान, शिव भगवान, राम दरबार का मंदिर है, लेकिन प्राचीन मंदिर बाबा सेवा दास की मान्यता
गांव में नहीं बल्कि आसपास दो दर्जन से अधिक गांवों में है। शादी से पहले हर युवक मंदिर में मत्था टेककर आगे की ओर कदम रखता है।
गांव में लगभग 30 फीसदी अनुसूचित जाति सहित ब्राह्मण व पिछड़ी जाति के लोग हैं। गांव में श्री कृष्ण बाल गोशाला स्थापित है, जिसमें लगभग 2700 गोवंश निवास करते हैं। पहाड़ की तलहटी में हनुमान मंदिर बना हुआ है। जहां हर वर्ष 26 जनवरी को मेले, भंडारे और दंगल का आयोजन होता है। गांव में सैनिकों की संख्या भी काफी है। इनमें से स्वर्गीय धन्शीराम परमवीर चक्र विजेता थे तो वहीं शहीद सुनील कुमार दुश्मन से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। साथ ही मुरारी लाल भी शहीदों की सूची में शामिल हैं। भाईचारे में भी गांव की विशेष पहचान बनी हुई है।
सुविधाओं पर नजर डाली जाए तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कन्या प्राथमिक पाठशाला, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, लघु सचिवालय, जोहड़ व तालाब, हरिजन चौपाल, नंदी आरओ प्लांट, मुख्य चौपाल की समुचित व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के अभाव के चलते व्यवस्था चरमराई हुई है। इसके चलते पानी निकासी के लिए बनाए गए नाले गंदगी से लबालब हैं। आबादी को देखते हुए यहां 6 सफाई कर्मचारियों की जरूरत महसूस की जा रही है।
वर्जन:
गांव में विकास कार्य पर जोर दिया जा रहा है। गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने, नशामुक्ति और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियानों को आगे बढ़ाने का प्रयास लगातार जारी है। ग्राम पंचायत अपने पंचों की सलाह मशविरा पर विकास कार्यों में जुटी है।-बीना देवी, सरपंच बिहाली।