अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। गांव पाली में महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी टूटने से किसानों की लगभग 20 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हो गया। ग्रामीणों के अनुसार सोमवार शाम को नहर टूट गई थी। लेकिन रात को अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। मंगलवार सुबह मौके पर पहुंचे जेई ने डिस्ट्रीब्यूटरी को बंद करवाया। तब तक खेतों में लगभग छह से आठ फुट पानी भर चुका था। देर से पहुंचे अधिकारियों को लेकर किसानों ने विरोध जताया। इसके बाद जेई ने जेसीबी मशीन बुलाकर नहर की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया। वहीं, किसानों ने नुकसान हुई फसल का मुआवजा देने की मांग की है।
बता दें कि महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी 1987 में बनी थी। इससे 15 से 20 गांवों को पानी मिलता है। डिस्ट्रीब्यूटरी की क्षमता 116 क्यूसिक पानी की है। डिस्ट्रीब्यूटरी में 26 दिन में पानी आता है, जोकि 15 दिन तक चलता है। सोमवार को डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी के आने का अभी प्रारंभिक समय ही था कि वह टूट गई। किसानों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूटरी ओवरफ्लो होनेे के कारण टूटी है। पानी भरने से फसल खराब हो गई, इससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार एक लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देने के मांग की। वहीं, जेई ने किसानों को आश्वासन दिया कि वे मुआवजा दिलाने का पूरा प्रयास करेंगे।
इन किसानों की फसल हुई खराब
नहर टूटने से गांव पाली के 10 किसानों की लगभग 20 एकड़ भूमि पर कपास, बाजरा, ग्वार और ज्वार की फसल खराब हो गई। इसमें अरुण शर्मा की चार एकड़, रविंद्र की साढ़े तीन एकड़, नरेश की दो एकड़, महेंद्र की डेढ़ एकड़, सुरेश की डेढ़ एकड़, मदन की डेढ़ एकड़, भरत सिंह की एक एकड़, सत्यनारायण की दो एकड़, राजू की डेढ़ एकड़, राजपाल की डेढ़ एकड़ फसल खराब हो गई।
पांच साल से नहीं हुई नहर की मरम्मत
महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी पाथेड़ा से निंबी जाती है। पिछले पांच वर्षों से नहर की मरम्मत नहीं हो पाई है। नहर में चूहों ने छिद्र कर रखे हैं। उन्हीं छिद्रों से पानी रिस-रिस कर मिट्टी का कटाव हो गया। पानी के तेज वेग से डिस्ट्रीब्यूटरी टूट गई। किसानों का कहना है कि पानी क्षमता से अधिक था और गति भी तेज थी, जिस कारण डिस्ट्रीब्यूटरी टूट गई।
वर्जन
डिस्ट्रीब्यूटरी टूटने के बारे में मेरे पास किसी किसान का फोन नहीं आया। सुबह विभाग के कर्मचारी का फोन आया था। इसके बाद सुबह छह बजे ही नहर बंद करवा दी थी। मरम्मत का कार्य अभी शुरू करवा दिया जाएगा। डिस्ट्रीब्यूटरी की क्षमता 116 क्यूसिक पानी की है। इसमें 60 क्यूयिक पानी चल रहा था। डिस्ट्रीब्यूटरी ओवरफ्लो नहीं थी। डिस्ट्रीब्यूटरी की पटरी में चूहों द्वारा होल करने या फिर कहीं आगे पेड़ टूट गया होगा। इस कारण भी डिस्ट्रीब्यूटरी टूट सकती है। उक्त डिस्ट्रीब्यूटरी को 300 क्यूसिक की क्षमता करने के लिए एस्टीमेट बनाकर भेजा हुआ है। लेकिन अभी परमिशन नहीं मिली है। इस प्रस्ताव को दोबारा मीटिंग में एसई के समक्ष रखेंगे।
- जितेंद्र कुमार, जेई, सिंचाई विभाग