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शिक्षा के गिरते स्तर के लिए दोषपूर्ण शिक्षा नीति जिम्मेदार: ईश्वरचंद शर्मा

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अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। युवाओं में बड़ी ऊर्जा शक्ति होती है। यदि उन्हें सही दिशा दे तो वह देश और समाज को बदलने की क्षमता रखते हैं। यह बात रविवार देर सायं सेक्टर एक स्थित मनुमुक्त भवन में भारत की वर्तमान शिक्षा पद्धति विषय पर आयोजित 31वीं साप्ताहिक संगोष्ठी तथा शिक्षक सम्मान समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोलते हुए मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी हिमांशु गुप्ता ने कही।
उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और कौशल का लोहा पूरी दुनिया मानती है। अच्छी शिक्षा व्यवस्था और स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना से उन्हें और अधिक निखारा संवारा जा सकता है। इससे पूर्व विशिष्ट वक्ता टीचर अवॉर्ड प्राप्त शिक्षाविद डॉ. ईश्वर चंद शर्मा ने भारत में शिक्षा के गिरते स्तर के लिए दोषपूर्ण शिक्षा नीति को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वर्तमान में हमारे तमाम शिक्षा संस्थान व्यापार के केंद्र बन कर रह गए हैं। जो केवल बिजनेसमैन तैयार कर रहे हैं। जबकि आदर्श नागरिक बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। शिक्षक नेता धर्मेंद्र यादव तथा महिला महाविद्यालय भीटेढ़ा राजस्थान के प्राचार्य सुमेर सिंह यादव ने भी संभागी वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।
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उन्होंने कहा कि भारत में आज भी विश्व गुरु बनने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए शिक्षा को अध्यात्म से जोडना आवश्यक है। चीफ ट्रस्टी डा. रामनिवास मानव के सानिध्य हुए इस समारोह में डा. ईश्वर चंद शर्मा, गणपत राम, देवदत्त शास्त्री तथा गीता चौधरी को शिक्षा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान हेतुु अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर राकेश कुमार, पार्षद महेंद्र गौड़, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता राम सिंह यादव, कवि संजय पाठक, पूर्व प्राचार्य डा. एसडी शर्मा, लीड बैंक मैनेजर एसडी पाठक, प्राचार्य मुकेश कुमार, किशन लाल शर्मा, दुलीचंद शर्मा, परमानंद दीवान, अशोक यादव, एनडी शर्मा, डा. कांता भारती, प्रोफेसर अंजू व प्रीति शर्मा आदि उपस्थित थे।
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