किसी काम के नहीं हैं खुले पड़े कुएं, हादसे की आशंका
-कई बार जानवर गिरकर हो चुके हैं घायल, कई कुआं की मुंडेर से है नीची, लोगों के गिरने का खतरा
फोटो नंबर एक से सात
देवेेंद्र यादव
नारनौल। पूर्व में हुए हादसों के बाद खुले कुएं को ढकने के कोर्ट और सरकार के आदेशों के बावजूद इस पर अमल नहीं किया गया। कुओं और बोरवेलों में गिरकर हुई बच्चों की मौत के बाद कोर्ट ने खुले हुए कुओं और बोरवेलों को ढकने के आदेश दिए थे। वहीं बंजर कुओं को बंद कराने के भी आदेश हैं। आदेशों का पालन कराने के लिए सरकार ने इस बारे में संबंधित अधिकारियों की भी नियुक्ति की है, पर कोई इसकी परवाह नहीं कर रहा है। तीन दिन पूर्व भी एक एक कुत्ता एक कुएं में गिर गया था। यही हाल है कि शहर और आसपास के क्षेत्र में आज भी अनेक खुले व बंजर कुएं हैं, जबकि ये किसी काम के नहीं हैं। नारनौल शहर में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
गुड़गांव के प्रिंस की बोरवेल में गिरने की घटना के बाद इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ घटनाओं में बच्चों की जान जा चुकी है। ऐसे में कोर्ट और सरकार ने सभी खुले हुए बोरवेलों और कुओं को ढकने के आदेश दिए थे। वहीं जहां-जहां बंजर कुएं हैं, उनको बंद करने के आदेश भी दे रखे हैं। इसके बावजूद शहर में आज भी अनेक कुएं खुले हुए हैं। वहीं कई बंजर कुएं भी मौत का मुंह लिए जैसे के तैसे ही स्थापित हैं। इनको बंद कराने की ओर प्रशासनिक अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। वर्षों से ये कुएं यूं ही खुले हुए हैं। इनमें अनेक बार पशु गिर भी चुके हैं। वहीं लोगों के गिरने का भी खतरा इनमें बना रहता है।
मुगलकालीन कुएं और बावड़ियां हैं शहर में
नारनौल शहर प्राचीन है। यहां पर कुएं और बावड़ियों की संख्या बहुतायत है। ऐसे में सैकड़ों कुएं यहां के पुराने मोहल्लों जैसे पीरआगा, बावड़ीपुर, नई सराय, पुरानी सराय, छोटा-बड़ा तालाब के पास, पुरानी मंडी, आदर्श नगर, रेवाड़ी रोड, मिया की सराय व जमालपुर में कई कुएं स्थापित हैं। इन कुओं में से कई कुएं तो बंजर हो चुके हैं, वहीं कई कुओं में अभी भी पानी है। वहीं किसी भी कुएं में अभी तक प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया है।
रविदास मंदिर के पास हैं कई कुएं खुले
रविदास मंदिर के पास व माता मसानी पर करीब पांच से छह कुएं ऐसे हैं, जो खुले हुए हैं। इनमें से एक कुआं बाबा पीर की मजार के पास तो बिल्कुल खुला हुआ है। यह रोड के बिल्कुल पास है और एक बार इसमें गाय और एक बार इसमें सूअर गिर चुका है। वहीं इसके आसपास बच्चे भी खेलते रहते हैं। जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे ही रेवाड़ी रोड पर भी कैलाश नगर व आदर्श नगर की ओर कई कुएं खुले हुए हैं।
कई बार पशु गिरकर हो चुके घायल
इन कुओं में अनेक बार पशु गिरकर घायल हो चुके हैं। अगस्त माह में महता चौक के पास स्थित एक खुले कुएं में सांड़ गिर गया था। इसको करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद लोगों ने बाहर निकाला था। इससे सांड़ बुरी तरह जख्मी हो गया था। वहीं तीन दिन पूर्व नागरिक अस्पताल में स्थित एक खुले कुएं में कुत्ता भी गिर गया था। इसे बाद में लोगों ने बाहर निकाला था। इसी प्रकार रविदास मंदिर मार्ग पर पीर बाबा के पास स्थित एक कुएं में गाय व सूअर भी गिर चुके हैं।
किसी काम के नहीं हैं ये खुले कुएं
शहर में स्थित ये कुएं अब बंजर बराबर हैं। कई कुओं में पानी तो है, मगर वह पीने योग्य नहीं है। शहर के अधिकांश कुओं में खारा पानी है। वहीं यहां के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा भी अधिक है। इस कारण कुओं का पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसे में इन कुओं को अब बंद करा देना ही सही उपाय है।
शहर में कई जगह कुएं खुले हुए हैं। रेवाड़ी रोड पर कई कुएं खुले हुए हैं। इनके आसपास बच्चे खेलते हैं। ऐसे में इनसे कोई भी हादसा हो सकता है। प्रशासन को इन कुओं को बंद कराना चाहिए।
-सुशील चौटाला
खुले हुए कुओं और बोरवेलों से कई हादसे हो चुके हैं। इससे कई जगह बच्चों की जान भी जा चुकी हैं। ऐसे में इस ओर ध्यान देना चाहिए। ये कुएं अब कोई काम के भी नहीं हैं।
-रजत उर्फ काकू
शहर में खुले हुए कुओं और बोरवेलों को ढकना बहुत जरूरी है। अगर इनको बंद नहीं किया गया तो कोई भी हादसा हो सकता है।
-मनोज कुमार
बोरवेल और कुओं में गिरने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर इन खुले व बंजर पड़े हुए कुओं को शीघ्र ढकवाना चाहिए।
- ओमप्रकाश
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शहर क्षेत्र में आने वाले कुओं की एक माह में पहचान की जाएगी कि कौन सा बंजर हो गया है और कौन सा खुला हुआ है। इसके बाद बंजर कुएं को भर दिया जाएगा, वहीं खुले कुएं को ढका जाएगा।
-अभय सिंह यादव, ईओ, नगर परिषद, नारनौल।