अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। गांव डालनवास में रंगों के उत्सव होली पर कोई रंग नहीं बिखरेगा। प्राचीन मान्यता को अपनाते हुए इस गांव में 572 साल से होली पर्व नहीं मनाया जाता। होली के दिन यहां दादी सती के मंदिर में मेला लगाया जाएगा। जिसमें आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु पहुंचेंगे।
बुजुर्गों के अनुसार गांव डालनवास में धुलंडी के दिन लगभग 572 वर्ष पूर्व एक युवती अपने होने वाले पति की अकस्मात मृत्यु पर उसकी चिता में सती हो गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि निकट के गांव माधोगढ़ के माडूराम का रिश्ता राजस्थान के गांव दोबड़ा की युवती के साथ तय हुआ था। होली के दिनों में माडूराम अपने दोस्तों के साथ खेलने के लिए डालनवास के एक मोहल्ले में आया था। खेलते समय माडूराम के सिर पर चोट लगने से उसकी की मौत हो गई। कहते है कि जिस युवती से माडूराम का रिश्ता तय हुआ था उसे अनहोनी का आभास हुआ तो उसने इस बारे में अपने परिजनों को बताया। अपने होने वाले पति से मिलने को कहा तो परिजनों ने युवती की बात पर यकीन नहीं किया । उन्होंने उसे शादी से पूर्व मिलने की अनुमति नहीं दी, जब वह होने वाले पति से मिलने की जिद पर अड़ी रही तो परिजनों ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया। कहते हैं कि कुछ समय बाद अचानक कमरे का दरवाजा खुल गया और युवती घर से अपने पति से मिलने के लिए निकल पड़ी तो परिजनों ने उसके पीछे ऊंट-घोड़े दौड़ाकर उसका पीछा भी किया लेकिन वे असफल रहे। युवती जब गांव डालनवास में पहुंची तो वहां माडुराम के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही थी। यह देखकर युवती बेहोश हो गई और जब उसे होश आया तब माडूराम की चिता को अग्नि दी जा रही थी। उसी समय युवती अपने होने वाले पति की जलती चिता में कूदकर सती हो गई। मान्यता है कि युवती ने सती होने से पूर्व कहा कि गांव में धुलंडी के दिन माडूराम की मौत के हशोक में रंग न खेलें और वरदान भी दिया कि इस स्थान पर जहां वह सती हुई, पूजा अर्चना करें तो चर्म रोगों से छुटकारा मिलेगा। मान्यता है कि दादी सती के मंदिर पर जो लोग सच्ची आस्था से उनकी पूजा अर्चना कर मन्नत मांगते है उन्हें चर्म रोग नहीं होते हैं तथा जिन्हें चर्म रोग होते है वो ठीक हो जाते हैं।
चर्म रोग होते है दूर ...
मान्यता है कि डालनवास मेले में आकर सती दादी की पूजा अर्चना करने पर चर्म रोग दूर होते हैं। यहां जोहडी में नहाने, मिट्टी निकालने से मस्से, दाद दूर हो जाते हैं। होली पर लगने वाले मेले में आसपास के गांवों के अलावा सीमावर्ती राजस्थान राज्य के लोग भी आते हैं।