अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। नमस्कार, तपाईको नाम के हो ? मेरो नाम लक्ष्मी हो ? तपाई कस्तो हुनुहुच्छू ? मं संच्ये छू...। यह नेपाली भाषा है। हरियाणा में सरकारी स्कूलो के छात्र अब नेपाली भी सीखेंगे। 21 नवंबर से शुरू हुए एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत अगले एक महीने तक स्कूलों में छात्रों को 22 भाषाएं सिखाई जाएंगी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने देश के स्कूली बच्चों को दूसरे प्रदेशों की भाषा सिखाने के लिए प्लान तैयार किया है। जिसमें 22 भाषाओं को शामिल किया गया है। भारत के अलग-अलग राज्यों में बोली जाने वाली इन भाषाओं के 5-5 वाक्य विद्यार्थियों को सिखाए जाएंगे। अध्यापक इन वाक्यों को लिखवाकर भी देखेंगे। स्कूली बच्चे इन भाषाओं के वाक्यों का पोस्टर बनाकर कक्षाओं में लगाएंगे। बच्चे घर में जाकर अपने अभिभावकों के साथ भी इन भाषाओं के शब्दों उपयोग करेंगे। स्कूल में तैनात आईटी के टीचर, कंप्यूटर टीचर, भाषा शिक्षक, प्रोग्रामर एमएचआरडी की वेबसाइट से इस बारे में विस्तृत गाइड लाइन को डाउनलोड कर बच्चों को बताएंगे।
इस तारीख को सिखाई जाएगी यह भाषा
21 नवंबर असमी, 22 नवंबर बंगाली, 26 नवंबर बोडो, 27 नवंबर डोंगरी, 29 नवंबर गुजराती, 30 नवंबर कन्नड़, 3 दिसंबर कश्मीरी, 4 दिसंबर कोंकणी, 5 दिसंबर मैथिली, 6 दिसंबर मलयालम, 7 दिसंबर मणिपुरी, 10 दिसंबर मराठी, 11 दिसंबर नेपाली, 12 दिसंबर उड़िया, 13 दिसंबर पंजाबी, 14 दिसंबर संस्कृत, 17 दिसंबर संथाली, 18 दिसंबर सिंधी, 19 दिसंबर तमिल, 20 दिसंबर तेलगू, 21 दिसंबर उर्दू।
हिंदी और अंग्रेजी में भी बताई जाएंगी भाषाएं
स्कूली बच्चों को उक्त 22 भाषा सिखाने के लिए पांच-पांच वाक्य बोले जाएंगे। ये वाक्य अंग्रेजी व हिंदी में भी समझाए जाएंगे, जिनकी शुरूआत नमस्कार से होगी। नमस्कार आपका क्या नाम है। मेरा नाम लक्ष्मी है। आप कैसे हो, मैं अच्छी हूं। इस तरह के वाक्य को इन सभी भाषाओं में बोलकर समझाया जाएगा। बच्चों से ये वाक्य बुलवाए भी जाएंगे।
बेस्ट वीडियो को मिलेगा पुरस्कार
इन भाषाओं को बोलते-सीखते हुए स्कूली बच्चों की वीडियो भी बनाई जाएंगी। जिसे हरियाणा शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। खंड, जिला स्तर के बेस्ट वीडियो को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा। जिन्हें पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
वर्जन
मुख्यालय की ओर से लेटर आया है। सभी स्कूलों को भेजकर एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत इस आयोजन को पूरा कराएंगे। बच्चे दूसरे प्रदेेशों की भाषा सीखेंगे तो उन्हें फायदा होगा। हमें अपने देश की भाषा, संस्कृति जानने का मौका मिलेगा।
- बिजेंद्र श्योराण, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़।