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रैतन बसेरे के लिए नहीं लगा कहीं साइन बोर्ड

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ढूंढे से नहीं मिलता रैन बसेरा, दस का दावा, चार लोगों की जगह
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महेंद्रगढ़।
नगर पालिका की इमारत के एक कमरे में बना शहर का एक मात्र रैन बसेरा जरूरतमंदों के काम नहीं आ पा रहा है। रैन बसेरे तक पहुंचने के लिए शहर में कहीं साइन बोर्ड नहीं लगाया गया, जिसके चलते अभी तक एक भी जरूरतमंद यहां तक नहीं पहुंच पाया है। गौर हो कि 2001 में नगरपालिका कार्यालय के ऊपर एक कमरा रेस्ट हाऊस के लिए बनाया गया था। इस कमरे में चार वर्ष से पालिका ने रैन बसेरा बनाया हुुआ है। रैन बसेरे में सुविधा नाम मात्र की है। इसके अंदर प्रशासन दस जरूरतमंदों के ठहरने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि कमरे के अंदर मात्र चार चारपाई बिछाई गई हैं।
शुक्रवार की रात को अमर उजाला टीम ने कई जगहों का दौरा किया था। इस दौरान 6 डिग्री तापमान में रेलवे स्टेशन के बाहर कुछ जरूरतमंद सो रहे थे। इसके अलावा एक व्यक्ति प्लेटफॉर्म पर कंबल ओढ़कर सो रहा था। इसके बाद टीम ने बस स्टैंड का दौरा किया। टीम ने अंत में रैन बसेरे की ओर रुख किया, जहां पर नगर पालिका कार्यालय का मुख्य द्वार बंद मिला। ऐसे में कोई जरूरतमंद कैसे रैन बसेरे तक पहुंच पाए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने हर जिले में जरूरतमंदों को ठंड से बचाने के लिए रैन बसेरे का इंतजाम करने के निर्देश दे रखे हैं।
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प्रशासन ने रेन बसेरे के लिए टीम बनाई हुई है। जो जरूरतमंदों को रेन बसेरे में शिफ्ट करवाएंगे। हम इस पर काम कर रहे हैं। कोई कमी है तो उसे पूरा किया जाएगा।
जिला उपायुक्त, गरिमा मित्तल।
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कभी कभार एक या दो जरूरतमंद आ जाते हैं। साइन बोर्ड नहीं है तो वो लगवा दिए जाएंगे। जरूरतमंदों के लिए दस बिस्तरों की व्यवस्था भी की गई है।
- रीना गर्ग, नगरपालिका चेयरपर्सन
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